भारत अल्पवित्त ईक्विटी निधि

भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2012 में तरलता की उत्कट कमी के निराकरण के लिए आवश्यक कदम उठाते हुए `100 करोड़ की निधि की स्थापना की (यथा केंद्रीय बजट 2011-12 में आईएमईएफ) जिसका संचालन सिडबी द्वारा किया जाना था। जिसका उद्देश्य उन लघु और सामाजोन्मुख सूक्ष्म वित्त संस्थानों को सुदृढ़ बनाना था जो विशेष रूप से अल्प सेवित राज्यों/ क्षेत्रों में कार्य करते हैं। वित्तीय वर्ष 2013-14 में आईएमईएफ के आवंटन को बढ़ा कर `200 करोड़ कर दिया गया। इस निधि के माध्यम से सूक्ष्म वित्त संस्थाओं को बैंकों और वित्तीय संस्थानों से अधिक कर्ज़ निधि का लाभ उठाने में मदद मिलने की आशा है और इससे देश के असेवित / अल्प सेवित क्षेत्रों में गरीबों को सहायता के प्रवाह में वृद्धि से मदद मिल सकती है। 30 सितंबर, 2017 तक, 65 सूक्ष्म वित्त संस्थाओं ने इस निधि के अंतर्गत `195.50 करोड़ की वचनबद्धता की गई।

सूक्ष्म वित्त क्षेत्र पर आईएमईएफ के वित्तपोषण के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए सिडबी द्वारा कराए गए प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन से पता चला है:

  • इस निधि का सूक्ष्म वित्त क्षेत्र के बड़े हिस्से में उनकी समग्र संधारणीयता के निर्माण के मामले में उच्च और सकारात्मक प्रभाव रहा और संस्थागत संधारणीयता / स्थिरता के क्षेत्र में इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ा।
  • पहुँच का दायरा बढ़ाने, ऋण देने की प्रथाओं और परिचालन दक्षता के क्षेत्र में सूक्ष्म वित्त क्षेत्र के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
  • उनकी नियामक स्थिति कुछ भी रही हो पर सूक्ष्म वित्त संस्थाओं में प्रभाव एक समान था।