पर्यावलोकन

ये ग्राहकानुकूलित योजनाएँ इसलिए तैयार की गयी हैं कि उनसे संवृद्धि के विभिन्न चरणों वाले सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्यमों की विशेष जरूरतों को पूरा किया जा सके। सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्यमों को निम्नांकित तरीकों से वित्तीय सहायता मुहैया कराई जाती है:

  1. पात्र प्राथमिक ऋणदात्री संस्थाओं जैसे – बैंकों, एनबीएएफसीज और अल्प वित्त संस्थाओं को संस्थागत वित्त ताकि वे आगे सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्यमों को उधार दे सकें।
  2. अपने अखिल भारतीय शाखा नेटवर्क के माध्यम से प्रत्यक्ष वित्त। इसमें ‘मेक इन इंडिया’ पर विशेष बल रहता है, और
  3. सूक्ष्म वित्त संस्थाओं का आम तौर पर और लघु एवं मध्यम उद्यमों का विशेष रूप से संवर्द्धन व विकास, ताकि यह क्षेत्र सुदृढ़, जीवंत और प्रतिस्पर्धी बन सके।