एमएसएमई पल्स

एमएसएमई पल्स की आवश्यकता

कोई भी निर्णय करने के लिए जानकारी का होना प्रमुख है और यदि यह सही समय पर मिल जाए तो सार्थक हस्तक्षेप किए जा सकते है। चूंकि वर्ष के दौरान एमएसएमई से संबंधित सुरचित आंकड़े उपलब्ध नहीं होते हैं, ऐसे में कोई शुरुवाती संकेतों के न होने से नीति निर्धारण से जुड़े उन महत्वपूर्ण लोगों को, चाहे वे बैंकर हों अथवा नीति निर्धारण-करता, निर्णय करने में अपेक्षित मदद नहीं मिल पाती है। अतएव नीति निर्धारकों को अंतर्दृष्टि प्रदान करने हेतु एमएसएमई घटक की निकट निगरानी और अनुवर्तन के आधार पर तैयार एक व्यापक दस्तावेज़ का होना अत्यावश्यक हो जाता है। भारतीय बैंकिंग प्रणाली के साथ ऋण सुविधा प्राप्त कर जुड़े हुए औपचारिक ऋण की पहुँच वाले 5 मिलियन से अधिक सक्रिय एमएसएमई पर किए गए एक अध्ययन पर आधारित कोई भी रिपोर्ट अभी तक उपलब्ध नहीं है। बैंकों के संबंध में कुछ आंकड़े उपलब्ध हैं, जबकि एनबीएफसीज़ के संबंध में कोई आंकड़े उपलब्ध नहीं है। इसके अतिरिक्त, ये आंकड़े यह नहीं बताते कि कितने नए उद्यमियों ने ऋण के लिए पहुँच बनाई है और विभिन्न राज्यों में इसकी क्या स्थिति है। एमएसएमई पल्स अर्थात व्यापक तिमाही रिपोर्ट की शुरुआत इस अंतराल को भरने का एक ऐसा प्रयास है जिसका उद्देश्य ऋण उद्योग को जानकारी आधारित व्यावसायिक निर्णय लेने के लिए प्रवृत्तियों की सूचना और अंतर्दृष्टि प्रदान करना है।

एमएसएमई पल्स के दूसरे संस्करण के मुख्य निष्कर्ष (अप्रैल - जून 2018)

  • ऋण वृद्धि में व्यापक आधार पर सुधार :कुल मिलाकर क्रेडिट एक्सपोजर (वर्षानुवर्ष) ने पिछली पांच तिमाहियों में सबसे ज्यादा वृद्धि दर दर्शायी है। इसके अलावा, सितंबर 17 की घटत के बाद, बड़े क्षेत्र का एक्सपोजर (रु 100 करोड़ से अधिक क्रेडिट एक्सपोजर) लगातार दो तिमाहियों में बढ़ गया है जो क्रेडिट वृद्धि की वापसी के शुरुआती संकेत दिखा रहा है। सूक्ष्म (रु 1 करोड़ से कम क्रेडिट एक्सपोजर) और एसएमई (रु 1 करोड़ - रु 25 करोड़ की सीमा में क्रेडिट एक्सपोजर) इन क्षेत्रों का समेकित क्रेडिट एक्सपोजर रु 12.6 लाख करोड़ होता है (वाणिज्यिक ऋण बकाया का 23%) जिसमें वर्षानुवर्ष क्रमशः 22.2% और 12.8% की वृद्धि दर्ज़ हुई है। इसकी तुलना में, मार्च 17 और मार्च 18 के बीच, मध्यम क्षेत्र (रु 25 करोड़ - 100 करोड़ की सीमा में क्रेडिट एक्सपोजर) के एक्सपोजर में 7.2% और बड़े क्षेत्र ( रु 100 करोड़ से अधिक क्रेडिट एक्सपोजर) में 5.9% की वृद्धि दर्ज़ की गई है।
  • बड़े घटक की आस्तियों में गिरावट जारी है, मध्यम घटक में अनर्जक आस्ति (एनपीए) दर प्रतिबंधित है: बड़े कॉर्पोरेट घटक में, एनपीए दरें 15.3% (मार्च 17) से बढ़कर 18.0% (मार्च 18) हो गईं। मध्यम घटक की एनपीए दर में दिशात्मक कमी (मार्च 17 में 16.3% से मार्च 18 में 15.9%) का श्रेय इस बात को दिया जा सकता है कि अशोध्य ऋण पुनर्निर्माण कंपनियों (एआरसी) को बेचे गए और इस घटक की ऋणवृद्धि में बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि के दौरान एआरसी के प्रबंधन के तहत समान राशि से संपत्तियां बढ़ीं है।
  • एमएसएमई के लिए अपेक्षाकृत स्थिर आस्ति गुणवत्ता:एमएसएमई एनपीए दरें स्थिर और सीमाबद्ध बनी हुई हैं। सूक्ष्म घटक में एनपीए दर 8.9% (मार्च 17) से घटकर 8.8% (मार्च 18) हो गई है। एसएमई क्षेत्र में एनपीए दर 11.4% (मार्च 17) और 11.2% (मार्च 18) के बीच आ गई। मार्च 18 तक की अवधि हेतु एमएसएमई के लिए स्वीकृत एनपीए एक्सपोजर रु 81,000 करोड़ है।
  • आस्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए संवृद्धि:इस घटक में भावी एनपीए रु 11,000करोड़ के एक्सपोजर एनपीए के रूप में संचालित हो सकते हैं, जिसे वर्तमान में 'मानक' के रूप में टैग किया गया है, लेकिन इन इकाइयों के कम से कम एक या अधिक ऐसे एक्सपोजर है जिन्हें अन्य बैंकों या क्रेडिट संस्थानों द्वारा एनपीए के रूप में टैग किया गया है । इसके अतिरिक्त, 31 मार्च, 18 तक, उन इकाईयों के रु 120,000 करोड़ का सिस्टम-व्यापी एक्सपोजर है जिनके सिबिल एमएसएमई रैंक (सीएमआर) सीएमआर-7 से सीएमआर-10 के बीच है । सीएमआर -7 से सीएमआर -10 उच्च जोखिम से जुड़े हुए हैं। इन उच्च जोखिम वाले एक्सपोजर से मार्च 19 तक एनपीए में रु 16,000 करोड़ जुडने की संभावना है। हालांकि, इस घटक में मजबूत क्रेडिट मांग व क्रेडिट मांग के औपचारीकरण द्वारा संचालित अन्य स्थितियों के बीच इस क्षेत्र में कुल एनपीए दर नियंत्रण में रहने की संभावना है। इसके अलावा, रु 25 करोड़ रुपये तक के कुल एक्सपोजर वाले एमएसएमई उधारकर्ताओं को आरबीआई, चुकौती के लिए 90 दिन के विस्तार की राहत दे रही है, इससे इस घटक में लगभग रु 15,000 करोड़ के सकल एनपीए के प्रतिवर्तन की संभावना है।
  • नए निजी बैंक एमएसएमई अवसर का लाभ लेने में सबसे सफल:निजी बैंकों और एनबीएफसी ने सूक्ष्म और एसएमई के ऋणों में उनकी बाजार हिस्सेदारी में और बढोत्तरी की है और वे मार्च 2017 में 27.5% और 9.1% से बढ़कर क्रमश: मार्च 18 में 30.3% और 10.9% हो गए हैं। इसी अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र बैंक (पीएसबी) का हिस्सा 57% से गिर कर 50.4% तक हो गया है। उच्च विकास दर के बावजूद नए निजी बैंकों के पास न्यू टू बैंक (एनटीबी) उधारकर्ताओं के अधिग्रहण की बेहतर गुणवत्ता है, जिनमें से 46% उच्च गुणवत्ता वाले सीएमआर -1 से सीएमआर -3 तक हैं। इसकी तुलना में, अन्य उधारदाताओं के पास सीएमआर -1 में सीएमआर -3 में उनके वृद्धिशील उधारकर्ताओं का 35% हिस्सा है।

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