पर्यावलोकन

सिडबी के प्रयास और नवारंभ उद्यमों (स्टार्ट-अप) का जीवनचक्र

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भारतीय अर्थव्यवस्था को रूपांतरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आधुनिक उद्यमियों के व्यावसायिक विचारों को समर्थन देने तथा उन्हें विकसित एवं संपोषित करने के प्रबल प्रयोजन से, सिडबी देश में उद्यम पूँजी पारितंत्र के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। सिडबी अपने अनेकानेक आवश्यकता-आधारित उत्पादों के माध्यम से ऋण एवं पारितंत्र को सहयोग देता है और सोच-विचारकर अभिकल्पित किए गए अपने उन प्रयासों का परिचालन करता है, जो विचार-उत्पत्ति से लेकर उद्यम गठन तथा उद्यम विकास तक की एक आधुनिक उद्यमी की उद्यम-यात्रा के प्रत्येक चरण की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। ऊर्जावान उद्यमशीलता के लिए एक ऐसे समर्थकारी पारितंत्र के निर्माण में सिडबी के प्रयासों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसमें उद्यमों को संबंधित हैंडहोल्डिंग सहायता के साथ पूँजी का सशक्त प्रवाह उपलब्ध कराया जाता है। नवारंभ उद्यमों (स्टार्ट-अप) / एमएसएमई के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने हेतु सिडबी दो दशकों से अधिक समय से विभिन्न वैकल्पिक निवेश निधियों / उद्यम पूँजी निधियों की समूहनिधियों में अंशदान करता रहा है, जो आरंभिक एवं संवृद्धिशील, दोनों प्रकार के नवारंभ उद्यमों (स्टार्ट-अप) / एमएसएमई उद्यमों में प्रतिनिवेश करते हैं। सिडबी ने निधियों की निधि संबंधी अपने परिचालनों के अंतर्गत 110 से अधिक निधियों को 3600 करोड़ रुपये से अधिक की संचयी प्रतिबद्धता की है।

सिडबी नवारंभ उद्यमों (स्टार्ट-अप) में प्रत्यक्ष रूप से निवेश नहीं करता है, अपितु भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश निधियों की पूँजी में निवेश करता है। इस प्रकार, सिडबी वैकल्पिक निवेश निधियों की समूहनिधि में अंशदान करता है, ताकि वे आरंभिक चरण, मध्यवर्ती चरण एवं संवृद्धि चरण से संबंधित विभिन्न नवारंभ उद्यमों (स्टार्ट-अप) की ईक्विटी और ईक्विटी आधारित लिखतों में निवेश कर सकें।

नवारंभ उद्यम (स्टार्ट-अप) के लिए सिडबी निम्नलिखित निधियों का प्रबंध करता है :

नवारंभ उद्यम (स्टार्ट-अप) हेतु निधियों की निधि

  • भारत सरकार की नवारंभ उद्यम (स्टार्ट-अप) इंडिया कार्ययोजना के अंतर्गत
  • समूहनिधि – 10000 करोड़ रुपये (14वें एवं 15वें वित्त आयोग के कार्य-अवधि के दौरान निर्मित की जानी है)

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अभिलाषा (अस्पायर निधि)

  • अक्तूबर, 2016 में आरंभ
  • समूहनिधि – 60 करोड़ रुपये (310 करोड़ रुपये तक बढ़ाए जाने का प्रस्ताव है)

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भारत नवाकांक्षा निधि (इंडिया ऐस्पिरेशन निधि)

  • अगस्त – 2015 में आरंभ
  • 2000 करोड़ रुपये की समूहनिधि

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पात्रता

निवेश प्रक्रिया

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