पर्यावलोकन

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) उद्यमिता की पौध-शाला होते हैं। ये हमारी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। सिडबी 27 वर्ष से भी अधिक समय से एमएसएमई क्षेत्र में कार्यरत है। इस नाते यह एमएसएमई क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विश्वसनीय संरचनागत हस्तक्षेप करने में जुटा रहा है। अल्प वित्त संस्थाओं के विकास, ग्रामीण उद्यम संवर्द्धन, प्रत्यक्ष सहायता और अपने पुनर्वित्त के माध्यम से एमएसएमई क्षेत्र के लिए धन की आपूर्ति बढ़ाने में सिडबी का उल्लेखनीय योगदान है। नीतिगत पैरोकारी भी सिडबी का एक महत्वपूर्ण कार्यक्षेत्र रहा है। इसका सदैव यही प्रयास रहा है कि नीतिगत पैरोकारी के मामले में हितधारकों के प्रयासों की अनुपूर्ति के अर्थोपाय किए जाएँ। क्रिसिडेक्स अर्थात एमएसई भावना सूचकांक और एमएसई पल्स अर्थात एमएसएमई के स्वास्थ्य पर दृष्टि रखने के लिए तिमाही रिपोर्ट, इस दिशा में की गयी नवीनतम संरचनागत पहलकदमियाँ हैं। क्रिसिडिक्स का उद्देश्य आवधिक आधार पर एमएसएमई की भावनाओं अर्थात उनकी अपेक्षाओं और आकांक्षाओं का पता लगाना है, जबकि एमएसएमई पल्स का उद्देश्य एमएसएमई घटक का ‘आवधिक स्वास्थ्य अनुवर्तक’ बनना और यदि पीड़ा को प्रसन्नता में रूपांतरित करना है।