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Structural Interventions

क्रिसिडेक्स

भारत के लिए एमएसई सेंटीमेंट सूचकांक की आवश्यकता क्यों

प्रभावी नीति-निर्माण का प्रकार्य प्राप्त सूचना की गुणवत्ता पर केंद्रित होता है।

सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमसई) से संबंधित आँकड़े एक महत्वपूर्ण अंतराल के पश्चात् ही प्राप्त होते हैं। बुनियादी स्तर पर व्याप्त सेंटीमेंट कमी के संकेतक के साथ, एक व्यापक और संक्षिप्त दृष्टांतों से नीति निर्माताओं, उधारदाताओं, व्यापार-निकायों, अर्थशास्त्रियों, रेटिंग एजेंसियों और स्वयं एमएसई के लिए महत्वपूर्ण साधन उपलब्ध हो जाते हैं।

यद्यपि वृहद और मझोले नैगम प्रतिष्ठानों के कार्य-निष्पादन से संबंधित सूचकांक और सेंटिमेंट सर्वेक्षण पर्याप्त रूप से विद्यमान और कई दशकों से कायम रहे हैं, पर अभी तक भारत में इस प्रकार का कोई भी मापदंड उपलब्ध नहीं था।

हालांकि एकबारगी उपायों के रूप में व्यवसायिक चैंबर्स और विशिष्ट एजेंसियों द्वारा तदर्थ सर्वेक्षण संपन्न किए गए हैं, पर एक सूचकांक के निदर्शन के रूप में सतत सर्वेक्षण का फलीभूत होना पहली बार संभव हुआ है।

पर क्रिसिल और सिडबी द्वारा क्रिसिल-सिडबी एमएसई सेंटिमेंट सूचकांक, या क्रिसिडेक्स आरंभ करने के निर्णय के मूल में कौन से कारण रहे हैं।  

क्रिसिडेक्स का प्रकरण

  •     एमएसई का सीमित प्रतिनिधित्व – जिनका भारत के उद्यमों में 90% तक की हिस्सेदारी है और जो व्यापक और सूक्ष्म मूल्यांकनों में कृषि क्षेत्र के बाद दूसरे-सबसे बड़े नियोजक हैं।

  •     मौजूदा व्यावसायिक सूचकांक जीडीपी के वार्षिक परिवर्तन की दिशा के भविष्यवाणी के संबंध में ध्यान संकेंद्रित करते हैं, पर प्रत्येक उद्योग /क्षेत्र में सूक्ष्म स्तर पर प्रभाव का आकलन नहीं करता।

  •     नीति-निर्माता एमएसई पर अपने निर्णयों के प्रभाव-मूल्यांकन के संबंध में असमर्थ रहते हैं।

  •     रोजगार एवं उत्पादन की चक्रीय अवधियों के संबंध में यथेष्ठ विवरणों का अभाव, जो रोजगार और एमएसई क्षेत्र में पूँजी-विन्यास के आकलन का आधार हो सकता है।

  •     एमएसएमई से संबंधित वित्तीय जानकारी की उपलब्धता में अनपेक्षित अंतराल से उधारदाता  का समय से ऋण संबंधी निर्णय बाधित होता है। एमएसई के लिए औपचारिक वित्त तक अभिगम एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है।

  •     एमएसई यह आकलन करने में असमर्थ हैं कि वे अपने समकक्षी इकाइयों के सम्मुख किस प्रकार तैयार हैं |

  •     कोई क्षेत्र-विशिष्ट इंडेक्स नहीं है, जो सेंटीमेंट परिवर्तन की दशा को प्रक्षेपित करता हो और जो एमएसई द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सहायक सिद्ध हो सके।