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Structural Interventions

इंडस्ट्री स्पॉटलाइट

इंडस्ट्री स्पॉटलाइट की आवश्यकता

एमएसएमई क्षेत्र हमारे राष्ट्र की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में 6 करोड़ से अधिक एमएसएमई सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 29.7% का योगदान करते हैं और 11 करोड़ से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करते हैं। एमएसएमई क्षेत्र एक जीवंत और गतिशील क्षेत्र है और वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान कुल निर्यात में 48.1% की हिस्सेदारी के साथ एक प्रमुख निर्यात योगदानकर्ता के रूप में यह राष्ट्र की जीडीपी वृद्धि को ऊँचाई के अगले स्तर पर ले जाने के लिए वचनबद्ध है। तदनुसार, नीति निर्माताओं के लिए आंकड़ों की तत्काल ट्रैकिंग के आधार पर नीतियों का निर्माण करना महत्वपूर्ण हो जाता है। उद्योग क्षेत्रों की स्थिति और उनकी संभावनाओं का आकलन करने के लिए ऋण-प्रवाह हमेशा एक अच्छा संकेतक रहा है।

समूह भारतीय विकास गाथा का मुख्य आधार रहा है और उसी के दृष्टिगत सिडबी और सीआरआईएफ हाई मार्क ने "इंडस्ट्री स्पॉटलाइट" रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए मिलकर काम किया है। यह अपने प्रत्येक संस्करण में भावी निर्यातोन्मुख उद्योग क्षेत्र के क्षेत्रवार गहन अध्ययन को प्रस्तुत करता है। रिपोर्ट क्षेत्र के ऋण परिदृश्य, प्रमुख उधारदाताओं, क्षेत्रीय संरचना, उधारकर्ता घटकों के साथ-साथ इसका जोखिम विश्लेषण करती है। रिपोर्ट की अनूठी विशेषता समूह स्तर पर ऋण-प्रवाह का विश्लेषण है, जो संबंधित उद्योग क्षेत्र में स्थापित समूहों बनाम उभरते समूहों के स्तर पर और अधिक गहन अध्ययन के साथ संबंधित समूह में एमएसएमई की स्थिति की पुष्टि करता है।

कार्यपालक सारांश - ऑटो और ऑटो घटक उद्योग

ऑटो और ऑटो घटक उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में से एक है, जो देश में वृहद आर्थिक विकास और रोजगार आगे बढ़ा रहे हैं । बड़े आकार के कॉरपोरेट्स से लेकर सूक्ष्म इकाई तक ये देश भर में क्लस्टरों में फैले हुए हैं । ऑटो और ऑटो घटक उद्योग भारत की जीडीपी में 7% का योगदान देता है, और विनिर्माण की जीडीपी में लगभग 50% का योगदान करता है और 3.7 करोड़ से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्रदान कर निर्यात को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभाता है।

इस क्षेत्र में हाल की मंदी और कोविड-19 वैश्विक महामारी का प्रभाव:

हालांकि यह उद्योग पिछले कई वर्षों में उत्पादन और कारोबार के मामले में बढ़ रहा है, किन्तु हाल ही में घरेलू और वैश्विक ऑटो बाजारों में मंदी, ऋण पाने में कठिनाई और इसके साथ-साथ देश में नीतिगत और बाजारगत परिवर्तनों के कारण 2019 में ऑटो और ऑटो घटकों के क्षेत्र पर एक गंभीर प्रभाव पड़ा है। तथापि विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2019-20 की आखिरी तिमाही में उद्योग में वापस उछाल आएगा, इस क्षेत्र के उत्पादन और बिक्री में अभूतपूर्व गिरावट देखी गई क्योंकि मार्च 2020 में नोवल कोरोना वायरस (कोविड -19) के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार द्वारा लगाई गई तालाबंदी के दौरान देश लगभग थम-सा गया था।

वित्त वर्ष 2019-20 में ऑटोमोबाइल उद्योग ने 26.36 मिलियन वाहनों का उत्पादन किया, पिछले वर्ष की तुलना में उत्पादन में 15% की गिरावट देखी गई और बिक्री 18% कम हो गई। ऑटो घटक उद्योग का कुल कारोबार वित्त वर्ष 2019-20 में रु. 3.49 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12% कम है।

ऋण में वृद्धि:

जून 2020 तक इस क्षेत्र द्वारा प्राप्त किये गए ऋण की कुल राशि रु. 113हजार करोड़ रही, बाजार की मौजूदा मांग में मंदी का कारण, मार्च 2020 में तालाबंदी के तत्काल बाद ही विनिर्माण गतिविधियों में ठहराव के कारण तिमाही-दर-तिमाही आधार पर इसमें 1% की मामूली वृद्धि देखी गई। यह क्षेत्र पहले से ही मांग में मंदी के दौर से गुजर रहा था, जिसके कारण पिछले वर्ष की इसी तिमाही के दौरान ऋण राशि में वृद्धि भी 2.3% रही। इस क्षेत्र में यथा जून 2020 तक परिमाण या सक्रिय ऋणों की संख्या 137.88 हजार रही ।

संविभाग स्वास्थ्य:

ऑटो और ऑटो घटक उद्योग ने पिछली 6 तिमाहियों में एनपीए में गिरावट (90+ दिनों के अनुपात में ऋण मूल्य में अपचार) देखी है, जो जून 2020 तक 9.95 % है। एनपीए में एक वर्ष में लगभग 3% की गिरावट और पिछली तिमाही की तुलना में 1.5 % की गिरावट आई है।

निर्यात ऋण वृद्धि:

क्षेत्र के निर्यात ने भी इस उद्योग में मंदी का प्रभाव महसूस किया। निर्यात-ऋण की समग्र राशि (मूल्य) में दिसंबर 2018 से मार्च 2019 तक में 35% की भारी गिरावट देखी गई। यथा सितंबर 2019 में तिमाही-दर-तिमाही में वापसी के कुछ संकेत दिखाई दिए और निर्यात-ऋण में 5% की वृद्धि देखी गई किन्तु दिसम्बर 2019 तक दुबारा इसमें 5.1 % की गिरावट देखी गयी । कोविड-19 वैश्विक महामारी और मार्च 2020 में राष्ट्रव्यापी तालाबंदी ने ऑटो और ऑटो घटक उद्योग के निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है और जून 2020 तक इसमें पिछली तिमाही की तुलना में निर्यात ऋण में 20 % की गिरावट और जून 2019 की तुलना में 14% की गिरावट है।

ऑटो क्षेत्र में दिए गए कुल ऋणों (मात्रा की दृष्टि से) का 91% सूक्ष्म, लघु और मध्यम खंड के उधारकर्ताओं में केंद्रित है:

ऑटो और ऑटो घटक उद्योग में जून 2020 तक लगभग 1.29 लाख उधारकर्ताओं की मौजूदगी है। एमएसएमई उधारकर्ता खंड में जून 2020 तक इस क्षेत्र के लिए दिए गए ऋण (मात्रा की दृष्टि से) की हिस्सेदारी कुल संख्या में 91% है।

इस उद्योग में सूक्ष्म उधारकर्ता खंड की ऋण में हिस्सेदारी सर्वाधिक 58 % की है, जिसमें जून 2019 के स्तर से 4% बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि लघु उधारकर्ता खंड में जून 2019 के स्तर से 1 % की कमी आई है। मध्यम उधारकर्ता खंड की हिस्सेदारी में जून 2020 के स्तर से वर्षानुवर्ष लगभग 2% की गिरावट देखी गई है।

ऑटो क्षेत्र सेक्टर की कुल ऋण राशि का 80 % शीर्ष ऑटो समूहों में केंद्रित है:

यथा जून 2020 तक ऑटो और ऑटो घटक उद्योग द्वारा लिए गए समग्र ऋण (ऋण राशि) का 80% शीर्ष 8 क्लस्टरों के हिस्से में आता है। इन क्लस्टरों के भीतर, सुस्थापित क्लस्टरों (कुल ऋण 5000 करोड़ रुपए से अधिक), उदाहरणार्थ : मुंबई-पुणे क्लस्टर, दिल्ली- गुड़गांव-फरीदाबाद क्लस्टर व चेन्नई क्लस्टर का ऋण संविभाग में 93% योगदान है।

सानंद (अहमदाबाद) क्लस्टर और पीथमपुर क्लस्टर, सरकार के 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के अंतर्गत पहचाने जाने वाले उभरते समूहों में से हैं और इन क्लस्टरों ने जून 2020 तक ऋण संविभाग में अच्छी संवृद्धि और कार्यनिष्पादन प्रदर्शित किया हैं। यथा जून 2020 तक 15.31 हजार करोड़ रुपए का एमएसएमई ऋण, 8 शीर्ष ऑटो क्लस्टरों के ऋण संविभाग का केवल 17% है और इसमें 2.3 % की वर्षानुवर्ष संवृद्धि देखी गई है।