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मुख्य परिणाम/गतिविधियां

मुख्य परिणाम/गतिविधियां : परिणाम I: ऐसा नीतिगत एवं संस्थागत वातावरण निर्मित करना, जो गरीब लोगों के लिए जिम्मेदाराना तरीके से वित्तीय सेवा-प्रदायगी को प्रोत्साहित करे।

  • नीतिगत पैरोकारी के लिए राष्ट्र और राज्य स्तर के चिन्तक तैयार करना।

  • व्यवसाय-प्रतिनिधि, शाखा-रहित बैंकिंग, ऋण-केन्द्र आदि पर प्रायोगिक प्रदर्शन आरंभ करना।

  • उभरते हुए मुद्दों तथा चिह्नित विषयों वाले क्षेत्रों पर समय-समय पर सेमिनार व कार्यशालाओं का आयोजन।

  • अल्प वित्त संस्थाओं के प्रतिनिधि-संगठनों को पैरोकारी सहायता देना, ताकि वे आचार-संहिता का प्रभावी कार्यान्वयन कर सकें और

  • अल्प वित्त क्षेत्र के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने व बनाए रखने के संबंध में केन्द्र व राज्य सरकारों को जागरूक कर सकें।

परिणाम II: ऐसी संस्थाओं का प्रवर्तन जो विविधतापूर्ण वित्तीय सेवाएं प्रदान करें:

  • ऐसी संस्थाओं का प्रवर्तन जो विविध प्रकार की वित्तीय सेवाएं प्रदान करें, ताकि ग्राहकों की विभिन्न आवश्यकताओं जैसे बचत, ऋण, बीमा और अंतरण सेवा आदि की पूर्ति हो सके।

  • वित्तीय सेवाएँ प्रदान करनेवाली विविध संस्थाओं जैसे- अल्प वित्त संस्थाओं, स्व-सहायता समूह चैनलों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों व समुदाय-आधारित संगठनों को सहायता प्रदान करना।

  • अल्प वित्त की निम्न पहुँच वाले चिह्नित क्षेत्रों में पहुँच में सुधार के उद्देश्य से संस्थाओं को प्रोत्साहित करना।

  • अन्य वित्तीय सेवाओं जैसे बचत, बीमा, अल्प-पेंशन एवं विप्रेषणों तक पहुँच में सुधार करना।

  • महिला-केंद्रित उत्पादों, हरित उत्पादों एवं अन्य ऋणों के लिए नए उत्पाद विकास में मदद करना, ताकि उक्त ग्राहकों की आवश्यकता पूरी की जा सके।

  • ऐसे नव-प्रौद्योगिकी-आधारित मॉडलों का प्रयोग आरंभ करने/उन्नयन के लिए सहायता देना, जो दक्षता में सुधार लाते हों, जिन्हें संस्थाओं को उपलब्ध कराना आसान हो, तथा जो ग्राहकों के लिए पारदर्शिता व सुविधा में बढ़ोत्तरी करनेवाले हों।

परिणाम III- महिलाओं की क्षमता की वृद्धि करना, ताकि वे वित्तीय एवं लिंग संबंधी मुद्दों का समाधान कर सकें :

  • एक ऐसे प्रशिक्षण के ज़रिए अल्प वित्त की ग्राहक-महिलाओं का कौशल, क्षमता तथा विश्वास विकसित करना जो वित्तीय साक्षरता, लैंगिक मुद्दों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और विधिक अधिकारों, सामाजिक विकास तथा विधिक अधिकारों (स्वास्थ्य, शिक्षा एवं विधिक अधिकार) पर केन्द्रित हो।

  • संस्थाओं के वरिष्ठ स्तर के स्टाफ के लिए लैंगिक जागरूकता प्रशिक्षण, ताकि अपनी संगठनात्मक नीतियों एवं प्रक्रियाओं में लैंगिकता को मुख्य धारा में लाया जा सके।