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एमएसई को चलनिधि सहायता प्रदान करने के लिए विशेष पुनर्वित्त योजना

एमएसई को चलनिधि सहायता प्रदान करने के लिए विशेष पुनर्वित्त योजना

  • पात्र प्राथमिक ऋणदात्री संस्थाएं (पीएलआई) को उनके सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) के अंतिम-उधारकर्ताओं की तरलता आवश्यकताओं को समर्थन प्रदान करने के लिए पुनर्वित्त सहायता प्रदान करना।
  • अनुसूचित बैंक (सार्वजनिक, निजी, विदेशी और लघु वित्त बैंक)
  • बैंकों के लिए (लघु वित्त बैंकों को छोडकर):
  • 3 वर्ष की अवधि से परिचालन में हो ।:
    • पिछले 2 वर्ष से लाभ अर्जित किया हो।
    • एमएसई का बड़े पैमाने पर बकाया संविभाग/ वित्तीय सहायता हो।
    • निवल मालियत `50 करोड़ से कम न हो।
    • जोखिम भारित आस्तियों के लिए पूंजी (सीआरएआर) 9% से कम न हो।
    • निवल गैर निष्पादित आस्तियां 10% से अधिक न हो।
    • लघु वित्त बैंकों के लिए :

    • भारतीय रिजर्व बैंक (भारिबैं) द्वारा लघु वित्त बैंक व्यवसाय करने के लिए अंतिम लाइसेंस दिया गया हो और लघु वित्त बैंक का संचालन शुरू कर दिया हो।
    • लघु वित्त बैंक में परिवर्तन से पहले लघु वित्त बैंक / पिछली इकाई (एक साथ लेते हुए) का पिछले 3 वर्षों में से कम से कम 2 वर्ष के दौरान लाभ अर्जित किया हो।
    • सूक्ष्म ऋण और/या एमएसई को दिए गए अग्रिमों सहित एक बड़ा बकाया संविभाग होना चाहिए; तथा
    • मंजूरी के लिए लागू बेंचमार्क मानदंडों का पालन निम्नानुसार किया जाना चाहिए:
    क्र.सं. मापदंड बीएफएस मानदंड
    1 निवल मालियत > > या = `100 करोड़
    2 जोखिम भारित आस्तियों के लिए पूंजी >> या = 15%
    3 सकल गई निष्पादित आस्तियां < या = 7%
  • अंतिम उधारकर्ता - सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (एमएसएमईडी) अधिनियम, 2006 के अनुसार एमएसई / दिनांक 26 जून, 2020 के भारत सरकार के राजपत्र अधिसूचना एस.ओ.2119 (ई) में निहित परिभाषा के अनुसार।
  • स्वास्थ्य देखभाल और 26 अन्य उच्च दबाव वाले क्षेत्रों (जैसा कि कामथ समिति द्वारा चिन्हित) में ईसीएलजीएस 2.0 के दायरे के तहत लागू होने वाले एसएमए -1 श्रेणी तक के एमएसई अंतिम-उधारकर्ता खाते पुनर्वित्त के तहत कवर किए जाने के लिए पात्र हैं।
  • गतिविधियां – सिडबी अधिनियम, 1989 की धारा 2(एच) में यथा परिभाषित
  • 12 माह तक अथवा 10 जून, 2022, जो भी पहले हो।
  • 36 माह तक (जो सिडबी के अपने निधि से प्रदान किया जाएगा)
  • चल और अचल आस्तियां, बही ऋण, प्राप्य, कार्रवाई योग्य दावों, गारंटी, असाइनमेंट, विनिमय बिल सहित सभी प्रतिभूतियों को बैंक सिडबी के ट्रस्टी के रूप में धारित रखेगा और इसके साथ-साथ सिडबी द्वारा बैंक को मंजूर किये गए ऋण से बैंक द्वारा उधारकर्ताओं को उपलब्ध कराई गई वित्तीय सहायता की प्रतिभूति हेतु प्राप्त प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तथा प्राप्त होने वाली अन्य प्रतिभूतियों को भी बैंक धारण करेगा।