सूक्ष्म वित्तीयन

सिडबी अल्प ऋण कोष

लक्ष्य & दृष्टिकोण

सिडबी अल्प ऋण कोष का लक्ष्य: आर्थिक रूप से वंचित लोगों को विशेष रूप से महिलाओं को अल्पवित्त सेवाएँ प्रदान करने के लिए सुदृढ़, व्यवहार्य और टिकाऊ अल्पवित्त संस्थाओं की राष्ट्रीय नेटवर्क सृजित करना।
दृष्टिकोण: वित्तीय और गैर-वित्तीय सेवाओं की सम्पूर्ण रेंज अल्प वित्त संस्थाओं को वित्तीय सहायता -

  • ऋण
  • क्षमता निर्माण अनुदान
  • ईक्विटी / अर्द्ध ईक्विटी
गैर वित्तीय सेवाएँ
  • आचार संहिता का मूल्यांकन (कोका)

सिडबी अल्प ऋण कोष

  • 100+अल्प वित्त संस्थाओं की क्षमता का विकास
  • संचयी मंज़ूरियाँ : ₹19029 करोड़
  • संचयी संवितरण : ₹17327 करोड़
  • 38.5 मिलियन से अधिक लाभार्थियों को प्रभावित किया
  • कुल लाभार्थियों में से लगभग 73% अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/पिछड़ा वर्ग के लाभार्थी
  • लाभार्थियों में से महिलाओं का अनुपात 96-98% था।
  • उद्यम गतिविधि को प्रोत्साहन दे कर आजीविका के स्वरूप में परिवर्तन लाया गया ।
डिपार्टमेन्ट फॉर इंटरनेशनल डेवलेपमेंट (डीएफआईडी)यूके के सहयोग से भारत में श्रेष्ठ अल्पवित्त प्रथाएँ लाने के लिए अप्रैल, 2000 में सहयोग आरंभ किया गया।
अल्प वित्त संस्थाओं को आगे ऋण सहायता देने के लिए अप्रैल-2002 में इंटरनेश्नल फ़ंड फॉर एग्रिकल्चर डेवलपमेंट (आईएफएडी), रोम के साथ सहयोग किया गया था।
  • भारतीय रिजर्व बैंक से लघु वित्त बैंक लाइसेंस प्राप्त करने वाली 10 संस्थाओं में से 8 सिडबी की भागीदार अल्प वित्त संस्थाएं थीं।
  • अल्प वित्त संस्था से लघु वित्त बैंक में सुचारु रूपांतरण के लिए आवश्यकता आधारित हस्तक्षेप किया गया।
  • रूपान्तरण के लिए प्रावधान सहित ईक्विटी निवेश और संसाधन सहायता।

उत्तरदायी वित्त के प्रयास

प्रमुख प्रयास

  • अल्प वित्त संस्थाओं की क्षमता का निर्माण
    वार्षिक क्षमता निर्माण आवश्यकता आकलन अभ्यास के आधार पर अल्प वित्त संस्थाओं को क्षमता निर्माण अनुदान का पर्याप्त और अनुकूलित पैकेज।
  • वृद्धि और रूपांतरण के लिए रूपांतरण ऋण
    गैर सरकारी संगठनों / अल्प वित्त संस्थाओं को लाभहीन से लाभवान अर्थात निगमित संरचना जैसे कंपनियों / गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में रूपान्तरण के लिए सहायता। इसे 2004 में शुरु किया गया जो कि सिडबी अल्प ऋण कोष के नवोन्मेषों में से एक सफल नवोन्मेष साबित हुआ।
  • क्षमता आकलन रेटिंग (सीएआर)
    अल्पवित्त क्षेत्र में सिडबी द्वारा अग्रणी क्षमता आकलन रेटिंग (सीएआर) को अल्पवित्त क्षेत्र में व्यापक मान्यता और स्वीकृति मिली है।

उत्तरदायी वित्त के प्रयास

उत्तरदायी वित्त के प्रयास
सभी हितधारकों के एमएफआई को समर्थन देने के लिए एमएफआई ऋणदाताओं के बीच सहयोग और जिम्मेदार उधार प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख एमएफआई ऋणदा

  • एक अल्प वित्त संस्था के आचार संहिता के अनुपालन की स्थिति का अन्य पक्ष द्वारा स्वतंत्र मूल्यांकन, आचार संहिता का मूल्यांकन है।
  • विकसित, मार्गदर्शी और आगे लाए गए सुसंगत आचार संहिता मूल्यांकन टूल (एचसीटी), अल्प वित्त संस्थाओं के नैतिक और अर्थक्षम उधार प्रथाओं के पालन की जांच करता है। 36 अल्प वित्त संस्थाओं के सुसंगत आचार संहिता मूल्यांकन टूल सिडबी के वेबसाइट पर होस्ट किये गए हैं।

  • एक मिश्रित बाजार डाटाबेस - भारतीय अल्प वित्त संस्थाओं पर मूल्यवान जानकारी प्रदान करने और प्रचार-प्रसार करने के लिए है।
  • अल्प वित्त संस्थाएं, इन संस्थाओं को आवधिक अंतराल पर वित्तीय और परिचालनगत आंकड़े प्रस्तुत करती हैं ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

अल्पवित्त से परे

अल्पवित्त से आगे - सूक्ष्म उद्यम के लिए बढ़ना

  • सस्ती दर पर बड़े आकार के ऋणों के लिए अल्प ऋण से सूक्ष्म उद्यम में बढ्ने वाले ग्राहकों को ऋण की पहुँच के लिए सुविधा प्रदान करना।
  • गैर लाभ वाली अल्प वित्त संस्थाओं के साथ भागीदारी करके एक प्रायोगिक कार्यक्रम आरंभ किया गया जिसमें अल्प वित्त संस्थाओं द्वारा सूक्ष्म उद्यमियों को `50,000 - `5 लाख की श्रेणी में ऋण दिए जा सकें।
  • यह मॉडल पूर्वी उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में सफलतापूर्वक चल रहा है और 15.40 % - 16.95% प्रति वर्ष पर ऋण दिये जा रहे हैं, जोकि अल्प वित्त संस्थाओं द्वारा दी जा रही चालू दरों से बहुत कम है।
  • • सूक्ष्म उधारकर्ताओं के लिए लागत और कम करने के लिए, सिडबी वर्ल्ड बैंक एवं यूएन महिलाओं के साथ मिलकर 'महिला आजीविका बॉन्ड' एक कम लागत वाले प्रभावी बॉन्ड शुरू करने के लिए कार्य कर रहा है ताकि निर्धन महिलाओं को उनकी उद्यमशील गतिविधियों के लिए 13-14% के बीच की लागत पर ऋण उपलब्ध कराया जा सके।
  • प्रायोगिक कार्यक्रम के सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर, इस पहल का देश के अन्य भागों में विस्तार किया जाएगा।

अल्पवित्त से परे

  • सिडबी अल्प वित्त कोष द्वारा अल्प वित्त क्षेत्र में उभरती चुनौतियों पर केन्द्रित सिडबी राष्ट्रीय अल्पवित्त काँग्रेस का पहली बार नई दिल्ली में 26-27 अक्तूबर 2018 के दौरान आयोजन किया गया।
  • इस काँग्रेस का उद्देश्य अल्पवित्त क्षेत्र में उभरती चुनौतियों का विश्लेषण कर उसे आगे लाना और उन चुनौतियों के समाधान हेतु नीति के पक्ष में सिफ़ारिश करना था।
  • इस काँग्रेस में विभिन्न हितधारकों के लगभग 300 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया था।
  • सिडबी के साथ `100 करोड़ के कॉर्पस के साथ केंद्रीय बजट 2011-12 में सृजित, जिसे बाद में बढ़ाकर `300 करोड़ किया गया।
  • अल्प सेवित राज्यों की छोटी अल्प वित्त संस्थाओं को केंद्रित करते हुए उनकी परिचालन क्षमता और स्केल को बढ़ाने के लिए ताकि वे वृद्धि जारी रख सकें, उन्हें प्राथमिक रूप से ईक्विटी / अर्ध ईक्विटी प्रदान करना उद्देश्य है।
  • 30 सितंबर, 2018 तक, सिडबी ने 66 अल्प वित्त संस्थाओं को 198 करोड़ की प्रतिबद्धता की है।
लक्ष्य "वित्तीय समावेशन में नवोन्मेष के लिए सिडबी सेंटर" की स्थापना के लिए आईआईएम लखनऊ को सहायता। उद्देश्य :
  • नए युग के वित्तीय उत्पादों और नवोन्मेषी व्यवसाय मॉडलों का विकास करना और भारत में वित्तीय समावेशन के तीव्र विस्तार के लिए फिनटेक अग्रणी नवोन्मेषी वित्तपोषण मॉडलों का प्रसार।
  • नए स्टार्ट-अप्स की सहायता करना, जिससे और उत्तरदायी संवृद्धि के लिए मानकों और उत्तम प्रथाओं को स्थापित करने में क्षेत्र की मदद की जा सके।
उद्देश्य : प्रतिभागियों को 'डिजिटल वित्तीय साक्षर' के रूप में विकसित करना और डिजिटल वित्तीय सेवाओं का उपयोग करने के लिए उन्हें विभिन्न कौशल से सुसज्जित करना और डिजिटल फाइनेंस स्पेस में सरकार के विभिन्न प्रयासों से परिचित करना। प्रथम चरण :
  • आयोजित कार्यक्रम: 112
  • भौगोलिक क्षेत्र : 07 राज्य। 107 अल्प व्यवसाय क्लस्टर
  • लाभार्थी: 6500 कारीगर, जिनमें से 40% महिलाएं थीं। लगभग 40% महिला कारीगर अब वित्तीय लेन-देन के लिए डिजिटल एप्लिकेशन का उपयोग कर रही हैं।
द्वितीय चरण:
  • कार्यक्रम आयोजित: 25
  • भौगोलिक क्षेत्र : उत्तर प्रदेश, बिहार एवं ओड़ीशा
  • लाभार्थी: महिलाओं पर केन्द्रित लगभग 1000 सूक्ष्म व्यवसाय