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UKAID

 

 

निर्धनतम राज्य समावेशी संवृद्धि कार्यक्रम (पीएसआईजी)
( वित्तीय समावेशन और महिला सशक्तीकरण)

ज्ञान श्रृंखला

ऐक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेड (एडीएस) की विशेषज्ञता-प्राप्त सहयोगी संस्था ऐक्सेस-असिस्ट इस कार्यक्रम के अंतर्गत परिणाम I- नीतिगत पैरोकारी पहल के कुछ घटकों के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी समूह भागीदार है।

नीतिगत पैरोकारी पहल: राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय घटनाएँ, अध्ययन एवं अनुसंधान|

(क)राष्ट्रीय चिन्तन दल:

राष्ट्रीय चिन्तन दल के बारे में

इस परियोजना के अंतर्गत एक राष्ट्रीय चिन्तन दल (एनटीटी) गठित किया गया है, जो इस क्षेत्र के अनुभवी कार्मिकों का एक परामर्शी मंडल है। एनटीटी में अल्पवित्त/ विकास क्षेत्र के महत्त्वपूर्ण विशेषज्ञ शामिल है जो हर तिमाही बैठक करते हैं और पीएसआईजी परियोजना के अंतर्गत वित्तीय समावेश नीति के मुद्दे पर महत्त्वपूर्ण सलाहें देते हैं। एनटीटी का मुख्य कार्य अल्प वित्त क्षेत्र से संबंधित नीतिगत मुद्दों पर ध्यान देना और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न संस्थाओं/ हितधारकों जैसे भारतीय रिज़र्व बैंक, भारत सरकार, इरडा, पीएफआरडीए आदि से एक समूह के रूप में संवाद स्थापित करना है। एनटीटी इस कार्यक्रम के अन्तर्गत समय-समय पर अन्य प्रयासों के लिए नीतिगत एवं रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। अभी तक चिन्तन दल की 7 बैठकें आयोजित हो चुकी हैं।

चिन्तन दल का गठन मुख्यतः निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए किया गयाः

  • कार्यक्रम के वित्तीय समावेशन एजेंडा के संबंध में रणनीतिक सलाह देना

  • नीति-निर्माण से जुड़ी संस्थाओं (जैसे भारिबैंक, इरडा, पीएफआरडीए, नाबार्ड) के साथ नेटवर्किंग और उन्हें बैठकों, लिखित संस्तुतियों तथा ज्ञापनों के ज़रिए प्रभावित करना

  • राज्य-स्तरीय समन्वयन समिति को नीति के संबंध में मार्गदर्शन देना

  • नीति संबंधी बहस में भाग लेना, अखबारों में लेख लिखना, वेब-आधारित संवाद और

  • नीति के कार्यान्वयन और पीएसआईजी कार्यक्रम के अन्य परिणामों के बारे में नीतिगत एवं रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करना

राष्ट्रीय चिन्तन दल के सदस्यों की सूची

क्रम सं.

नाम

पदनाम

1.

श्री बृज मोहन

 क्षेत्र विशेषज्ञ (सिडबी के पूर्व कार्यपालक निदेशक)

2.

श्री विजय महाजन

  संस्थापक और सीईओ, बेसिक्स सोशल एंटरप्राइज ग्रुप

3.

श्रीमति नूपुर मित्रा

अध्यक्ष एवं कार्यकारी न्यासी, एसएएसएफ, आईडीबीआई बैंक (पूर्व सीएमडी, देना बैंक)

4.

सुश्री जेनिफर इसर्न

रीजनल बिजनेस लाइन लीडर, ऐक्सेस टु फाइनेंस ऐडवाइजरी, साउथ एशिया, आईएफसी

5.

श्री एसकेवी श्रीनिवासन

कार्यपालक निदेशक, आईडीबीआई बैंक

6.

श्री एन श्रीनिवासन

 क्षेत्र विशेषज्ञ एवं परामर्शदाता

7.

डॉ (सुश्री) जॉय देशमुख रानादिव

 ग्लोबल हेड, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी- टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज

8.

CEO, MFIN

CEO, MFIN, New Delhi

9.

श्रीमति उषा अनन्त सुब्रहमण्यन

 अध्यक्ष और एमडी, भारतीय महिला बैंक

10.

Shri P. Satish

Executive Director, Sa-Dhan

11.

Shri Anand Srivastava

Banking Correspondent Federation Of India

12.

Jiji Mammen

CEO, MUDRA Bank

13.

Shri Tamal Bandhopadhya

Columnist with MiNT

14.

Smt Sudha Kothari

Chaitanya, Pioneers of SHG in India

15.

Shri Ram Rastogi

Product Innovation Head, National Payments Corporation of India (NPCI)

(ख)राष्ट्रीय कार्यक्रम एव सम्मेलन

(i)

बैंकों से अल्पवित्त क्षेत्र को निधिक प्रवाह के विषय में गोलमेज सम्मेलन: समस्याएँ, चुनौतियाँ और उपाय, जून 2012 < रिपोर्ट>

 

यह कार्यक्रम भारतीय बैंकिंग एवं वित्त संस्थान के साथ मिलकर आयोजित किया गया। इसमें अल्प वित्त संस्थाओं द्वारा भारिबैंक के दिशानिर्देशों तथा उद्योग की आचार संहिता, दोनों के अनुपालन की स्थिति से बैंकों को अवगत कराने का प्रयास किया गया। साथ ही प्रयास किया गया कि बैंकों की दुश्चिन्ताओं और जोखिम-अवधारणाओं की जानकारी ली जाए। अल्प वित्त संस्थाओं के मौजूदा कामकाज के बारे में बैंकों की अवधारणा को अनुकूल बनाने संबंधी विभिन्न रणनीतियों पर भी चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में इस क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों, जैसे बड़ी अल्प वित्त संस्थाओं, निजी/सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, नाबार्ड आदि ने प्रतिभागिता की।

(ii)

अल्पवित्त ऋण-प्रदायगी में जोखिम और शमन पर कार्यशाला-बैंकों से परामर्श- अप्रैल 2013 < रिपोर्ट>

 

यह बैठक अल्प वित्त संस्थाओं को ऋण प्रदायगी संबंधी चुनौतियों पर चर्चा के लिए बुलाई गई। कार्यशाला की मूल विषयवस्तु अल्पवित्त ऋण प्रदायगी में जोखिम और उसका शमन पर केन्द्रित थी। इसमें चर्चा मुख्यतः आन्ध्र प्रदेश संकट के बाद ऋण-प्रदायगी के उल्लेखनीय रूप से घटे हुए स्तर पर बैंकों के विचारों पर केन्द्रित रही। बैठक का एक महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि और अधिक संख्या में अल्प वित्त संस्थाओं को सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है, ताकि बैंक-निधीयन उच्च संवृद्धि दर वाली कुछ चुनिंदा अल्प वित्त संस्थाओं से हटाकर अपेक्षाकृत अधिक उत्तरदायित्व पूर्ण संवृद्धि वाले और अधिक अल्प वित्त संस्थाओं को सहायता देने की दिशा में अग्रसर हो जाए।

(iii)

भारत में बैंकिंग ढांचा – भावी दिशा’: नीतिगत गोलमेज सम्मेलन विषय “लघु वित्त बैंक: वित्तीय समावेशन के मार्ग?” सितंबर 2013

राष्ट्रीय घटनाओं सितं, 2013

रिस्पांस अक्टूबर 2013 को आरबीआई

 

भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपनी वेबसाइट पर ‘भारत में बैंकिंग ढाँचा – भावी दिशा’ विषय पर एक विमर्श-पत्र तथा श्री विजय महाजन द्वारा लिखा प्रपत्र ‘कॉल फॉर ऐन इन्क्लूजिव बैंकिंग स्ट्रक्चर फॉर इंडिया बाई 2019, फिफ्टी इयर्स आफ्टर बैक नेशनलाइजेशन’ जारी किया। इस पृष्ठभूमि में चिन्तन दल के सदस्यों का नीतिगत परामर्श आयोजित किया गया, जिसमें बैंकिंग और अल्पवित्त क्षेत्र के प्रतिनिधियों, जैसे भारिबैंक, सिडबी, नाबार्ड, एलएबी, आईआईबीएफ, अल्प वित्त संस्थाओं, एमएफआई नेटवर्क (एमफिन), रेटिंग एजेंसियों (एमक्रिल), निवेशकों व दानकर्ताओं ने भाग लिया। परामर्श के दौरान जिन महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर विचार किया गया, वे छोटे स्थानीय बैंकों के साथ-साथ बड़े बैंकों से संबंधित थे, जो देश के असेवित तथा अल्पसेवित क्षेत्रों की ज़रूरत पूरी कर रहे हैं। साथ ही बैंकों के स्तरों, भारत में हुए वित्तीय समावेशन की मात्रा तथा वित्तीय समावेशन के अजेंडा को पूरा करने में लघु वित्त बैंकों द्वारा निभाई जा सकनेवाली संभावित भूमिका पर भी विचार किया गया। कार्यशाला की संस्तुतियाँ भारिबैंक को अग्रेषित की गईं।

(iv)

सूक्ष्म बीमा पर चर्चा, नई दिल्ली, अक्तूबर 18, 2013 <रिपोर्ट>

 

पीएसआईजी के राष्ट्रीय चिंतक दल के सुझावों के आधार पर, चिन्तक दल के सदस्यों, डीएफआईडी, सिडबी, जीआईजेड, एलआईसी एवं निजी क्षेत्र के अन्य बीमाकर्ताओं तथा अल्प वित्त संस्थाओं के साथ एक बैठक आयोजित की गई, ताकि अन्य गैर-वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराते हुए वित्तीय समावेशन के एजेंडा को आगे बढ़ाने से जुड़ी मुख्य समस्याओं व चुनौतियों को समझा जा सके। इस मंच ने सूक्ष्म बीमा क्षेत्र की स्थिति तथा उद्योग के सामने आ रही मुख्य चुनौतियों पर चर्चा की। विभिन्न घटकों- जोखिम कारकों, जमाकर्ताओं तथा सक्षमता-कारकों की राय माँगी गई। चूंकि ऋणेतर वित्तीय सेवाओं की प्रदायगी पीएसआईजी कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्य अधिदेशों में से एक है, अतः उद्देश्य यह था कि जिन मुख्य मुद्दों को इस कार्यक्रम के ज़रिए सुलझाया जा सकता है, उन्हें समझा जाए और बाहर लाया जाए।

(v)

‘लघु वित्त बैंक’ तथा ‘भुगतान बैंक’ की लाइसेंसिंग के लिए भारिबैंक के दिशानिर्देशों के प्रारूप पर संस्तुतियाँ देने के लिए गोलमेज सम्मेलन, मुम्बई, क्रमशः जुलाई 22, 2014 एवं अगस्त 20, 2014

लघु वित्त बैंक

भुगतान बैंक

 

पीएसआईजी कार्यक्रम के नीतिगत एजेंडा के हिस्से के रूप में, वित्तीय समावेशन में वृद्धि के उद्देश्य से विशेषज्ञता-प्राप्त/पृथक बैंक स्थापित करने के लिए पैरोकारी के उद्देश्य से प्रयास किए गए हैं। भुगतान बैंकों व लघु वित्त बैंकों की लाइसेंसिंग के लिए 17 जुलाई 2014 को जारी प्रारूप-दिशानिर्देशों की पृष्ठभूमि में, गोलमेज सम्मेलन आयोजित किए गए, ताकि विभिन्न हितधारकों के साथ बातचीत हो सके और प्रतिसूचना ली जा सके। इस गोल मेज सम्मेलन में भारिबैंक, सिडबी, डीएफआईडी, एमफिन, एम-क्रिल, विभिन्न बैंकों, परामर्शदाताओं तथा अल्प वित्त संस्थाओं ने भाग लिया। दोनों गोलमेल सम्मेलनों में प्राप्त हुई संस्तुतियाँ तत्पश्चात् भारिबैंक को अग्रेषित कर दी गईं।

(vi)

ऋण आँकड़ा रिपोर्टिंग पर गोलमेज सम्मेलन, दिसंबर 08, 2014, नई दिल्ली <रिपोर्ट>

 

इन्क्लूजिव इंडिया समिट के उद्घाटन दिवस (08 दिसंबर 2014) पर नई दिल्ली में पीएसआईजी ने "अल्प वित्त के ऋण आँकड़ा रिपोर्टिंग संबंधी समस्याएं" पर गोल मेज सम्मेलन आयोजित किया। इस कार्यक्रम में बैंकों (सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक, क्षेग्राबैं तथा सहकारी बैंक), अल्प वित्त संस्थाओं, स्वसहायता समूह को बढ़ावा देनेवाली संस्थाओं, बीसी और बीसीएनएम, ऋण ब्यूरो, तकनीकी एजेंसियों, आईएफसी तथा अन्य संगठनों ने भाग लिया। ऋण ब्यूरो हाइमार्क ने चार पीएसआईजी राज्यों में अल्प वित्त की संभावना, स्कोप और कवरेज के विश्लेषण के लिए किए गए अध्ययन संबंधी अपने निष्कर्ष पेश किए। साथ ही, अति ऋणग्रस्तता/ उधारकर्ताओं के अति दोहन और चुकौती पर उसके प्रभाव के परिप्रेक्ष्य में जोखिम-प्रवणता, अल्प वित्त संस्था ऋण के बढ़ते आकार, उधारकर्ताओं के बहिर्गमन, जिला/तालुका स्तर पर अल्प वित्त की पैठ एवं वित्त के लिए उपलब्ध अन्य वैकल्पिक माध्यमों पर भी प्रकाश डाला गया। साथ ही, ऋण आंकड़ा रिपोर्टिंग में स्वसहायता समूहों को शामिल करने की संभावना, स्वसहायता समूहों के आँकड़ों को सदस्यों के साथ बाँटने, बैंकों तथा एसएचपीआई द्वारा स्वसहायता समूह आँकड़ा रिपोर्टिंग से जुड़ी चुनौतियों व समस्याओं तथा इन समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक उपायों व सहायता पर भी विस्तार से चर्चा की गई, तथा कुछ संस्तुतियाँ दी गईं।

(vii)

(iv) Roundtable on the MFI Bill Policy, February 24, 2015, Mumbai <attachment>

 

Regulation for microfinance in India has been a long standing priority and despite several efforts over in the last twenty years, the MFI sector does not have a comprehensive regulation covering all forms of MFI model. A policy paper “The Microfinance Bill: Need for a Fresh Outlook” authored by Dr. Alok Misra was released for comments by ACCESS ASSIST and UNDP in the Inclusive Finance India Summit in December 2014. A roundtable under PSIG was organised, to deliberate on the consensus on the outlook for microfinance regulation. The panel at the roundtable comprised of a mix of players, including representation from MFIN, M-CRIL, NBFC-MFIs, NGO-MFIs, investors, IBA, and sector experts. A total of 26 paticipants contributed in the roundtable. The members debated on the need for MFI Bill considering the changed policy landscape, the time and effort required for another round of legislative procedures and the suitable agency to champion the fresh impetus for a new bill, the majority, including the NBFC-MFIs supported the need for regulation covering all forms of microfinance, through the means of a bill. It was concluded that an omnibus regulation is required covering all forms of MFIs and regulatory approach should not be restricted to the legal type but by the type of the underlying activity/business. In the current policy landscape, NGO-MFIs are not the ideal legal entities to undertake financial intermediation, there has to be a supportive framework to enable them to transform within a defined time frame. Moreover, it is equally important to have robust client protection principles for other players like SBLP and Banks catering to the same client segment and clear policy/legal protection against state government intervention.

(viii)

Roundtable on Financial Inclusion in India-Small Finance Banks, New Harbingers of Hope, New Delhi on December 08, 2015 <attachment>

 

PSIG has a mandate of supporting and building capacities of institutions engaged in promoting access to financial services to the poor and vulnerable class. With the announcement of Small Finance Banks (SFBs) and transformation in the roles of the existing players and entry of new players in the financial inclusion space, need was felt to bring these new leaders together under one roof to discuss the opportunities and challenges which would be faced by them in taking financial inclusion to the next level. The roundtable was attended by the SFBs, Micro Save as the Technical Partner for the session, DFID, SIDBI, Sector Experts and other Stakeholders. Engaging discussion was held on key thrust areas like human resource management, technology, client segmentation & products, re-branding etc.

(ग) राज्य कार्यक्रम एवं सम्मेलन

(i)

पटना, बिहार में मई 2013 में एसएचपीआई-बैंक परामर्श बैठक, स्वसहायता समूह-बैंक लिंकेज को अगले स्तर तक ले जाना <रिपोर्ट>

 

यह कार्यक्रम नाबार्ड के सहयोग से आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य बिहार में स्वसहायता समूह-बैंक लिंकेज की मुख्य समस्याओं व कठिनाइयों को चिह्नित करना, उसपर चर्चा आयोजित करना और संबंधित हितधारकों के स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित करना था, ताकि स्वसहायता समूहों को बैंकों द्वारा ऋण-प्रदायगी में वृद्धि हो सके। कार्यक्रम का विषय था- स्वसहायता समूह-बैंक लिंकेज को अगले स्तर तक ले जाना। इसमें स्वसहायता समूह- बैंक लिंकेज मॉडल से जुड़े हितधारकों ने भाग लिया, जिनमें भारिबैंक, बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, एसएचपीआई, शीर्ष विकास वित्त संस्थाओं जैसे नाबार्ड और सिडबी, निधीयनकर्ता संगठनों, सरकारी विभागों तथा तकनीकी संसाधन एजेंसियों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। कार्यक्रम का निष्कर्ष यह निकला कि स्वसहायता समूहों की दीर्घकालिक सहायता और निगरानी के लिए संस्थाओं में रणनीतिक निवेश, प्रणाली विकास, एजेंसियों के प्रयासों में तालमेल और राजस्व आधारित मॉडल के विकास की जरूरत है।

(ii)

भुवनेश्वर, ओड़िशा में दिसंबर 2013 में अल्प वित्त के ज़रिए वित्तीय समावेश में तेजी लाने पर गोलमेज सम्मेलन- बैंकों/वित्तीय संस्थाओं के साथ संबंध स्थापन <रिपोर्ट>

 

आन्ध्र प्रदेश में 2010 के संकट के उपरान्त देश भर में (ओड़िशा सहित) बैंकों से अल्प वित्त संस्थाओं को निधि-प्रवाह पर बहुत बुरा असर पडा। तदनुसार एक गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अल्प वित्त संस्थाओं को ऋण देते समय बैंकों के साथ कौन-कौन-सी समस्याएँ और बाधाएँ आती हैं। साथ ही, इसका उद्देश्य हितधारकों और रेटिंग एजेंसियों, ऋण ब्यूरो, परामर्श-संगठनों, औद्योगिक निकायों आदि के मध्य परामर्शकारक बातचीत कराना भी था, ताकि राज्य की अल्प वित्त संस्थाओं की विश्वसनीयता को पुनः स्थापित करते हुए अल्प वित्त संस्था चैनल को और सुदृढ़ बनाया जा सके और विभिन्न हितधारकों के मध्य सहयोगपरक प्रयासों की संभावना का पता लगाया जा सके, जिससे अल्प वित्त क्षेत्र की सहायता की जा सके और बैंकों से अल्प वित्त संस्थाओं को निधि-प्रवाह में वृद्धि की जा सके।

(iii)

बिहार में सूक्ष्म बीमाः चुनौतियाँ और संभावनाएं पर पटना, बिहार में गोलमेज सम्मेलन, फरवरी 2014 <रिपोर्ट>

 

यह गोलमेज सम्मेलन बिहार में सूक्ष्म बीमा की चुनौतियों व संभावनाओं को समझने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। गोलमेज सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य था- बिहार में सूक्ष्म बीमा प्रदायगी की परिचालन एवं नीति संबंधी चुनौतियों को समझना, राज्य में सूक्ष्म बीमा प्रदायगी के संभावनाशील मॉडलों के घटकों को और उनमें वृद्धि की संभावना को समझना, पीएसआईजी एवं अन्य कार्यक्रमों में कैसे सहयोग की संभावना का पता लगाना और उसके प्रयास करना, इन महत्त्वपूर्ण समस्याओं में से कुछ को दूर करने तथा राज्य में सूक्ष्म बीमा की पैठ बढ़ाने के लिए प्रयास करना।

(iv)

उत्तर प्रदेश में वित्त तक पहुँच में तेजी लाना- बैंक-अल्प वित्त संस्था इंटरफेस पर लखनऊ, उत्तर प्रदेश में मार्च 2014 में गोल मेज सम्मेलन <रिपोर्ट>

 

आन्ध्र प्रदेश के 2010 के संकट के बाद उत्तर प्रदेश सहित, देश भर में बैंकों से अल्प वित्त संस्थाओं को निधि-प्रवाह पर बुरा असर पडा। इसलिए एक गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अल्प वित्त संस्थाओं को ऋण देते समय बैंकों के सामने कौन-कौन-सी समस्याएँ और बाधाएँ आती हैं। साथ ही, इसका उद्देश्य हितधारकों और रेटिंग एजेंसियों, ऋण ब्यूरो, परामर्श-संगठनों, औद्योगिक निकायों आदि के मध्य परामर्शकारक बातचीत कराना भी था, ताकि राज्य की अल्प वित्त संस्थाओं की विश्वसनीयता को पुनः स्थापित करते हुए अल्प वित्त संस्था चैनल को और सुदृढ़ बनाया जा सके और विभिन्न हितधारकों के मध्य सहयोगपरक प्रयासों की संभावना का पता लगाया जा सके, जिससे अल्प वित्त क्षेत्र की सहायता की जा सके और बैंकों से अल्प वित्त संस्थाओं को निधि-प्रवाह में वृद्धि की जा सके।

(v)

बिहार राज्य में व्यवसाय प्रतिनिधि के कार्य-निष्पादन पर कार्यशाला, जून 2014 <रिपोर्ट>

 

यह कार्यशाला व्यवसाय प्रतिनिधि माध्यम से बैंकों के कार्य-निष्पादन, कुछ चुनिंदा बीसीएनएम का समग्र परिचय देने और आधारभूत स्तर पर उनके सामने आ रही चुनौतियों के बारे में हितधारकों को परिचित कराने तथा विभिन्न हितधारकों, जैसे बैंकरों व बीसीएनएम से नीति के विषय में प्रतिसूचना लेने के उद्देश्य से आयोजित की गई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ‘बिहार में बीसी मॉडल का ड्रिल-डाउन अध्ययन’ प्रस्तुत करना और अपने निष्कर्षों व संस्तुतियों का प्रस्तुतीकरण करना था, ताकि राज्य में व्यवसाय प्रतिनिधि चैनल के कार्य-निष्पादन में वृद्धि जा सके। प्रेजेंटेशन माइक्रोसेव द्वारा किया गया।

(vi)

पटना, बिहार में सितंबर 2014 में पेंशन संग्राहक फोरम ( पहली बैठक) <रिपोर्ट>

 

तृतीय एसएफआईएफ बैठक में निर्मित मतैक्य के आधार पर, बिहार में पेंशन संग्राहक फोरम की स्थापना की गई है और उसकी स्थापना बैठक पीएसआईजी के सहयोग से 2 सितंबर 2014 को आयोजित की गई। इस फोरम में बिहार में कार्यरत प्रमुख पेंशन संग्राहक शामिल हैं। बैठक के दौरान विभिन्न नीतिगत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई, जैसे- राज्य सरकार के विभागों से सहायता, अग्रणी बैंकों के जिला स्तरीय वित्तीय साक्षरता केन्द्रों का समावेशन, समुदाय, बीसीए, बैंकरों को प्रशिक्षण एवं परामर्श प्रदान करते समय सूक्ष्म पेंशन को भी शामिल किया जाना, ग्राहकों के ऑनवर्ड नामांकन के लिए उच्चतर प्रोत्साहन के उद्देश्य से संग्राहकों की प्रोत्साहन-राशि में संशोधन आदि तथा परिचालन संबंधी मुद्दे जैसे स्वावलंबन योजना का विज्ञापन स्थानीय भाषाओं में जारी किया जाना तथा प्रचार-सामग्री की अपर्याप्त आपूर्ति, प्रान, संव्यवहार विवरणी, विज्ञापन सामग्री जैसे दस्तावेजों की प्राप्ति में विलंब आदि, धोखेबाज संग्राहकों की मौजूदगी के कारण लोगों में विश्वास की कमी, 60 वर्ष की आयु पूरी होने की स्थिति में बहिर्गमन/आहरण खंड में स्पष्टता का अभाव आदि। बैठक के कार्यवृत्त पेंशन निधि विनियामक विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) को भेजे गए हैं। सूक्ष्म पेंशन नियमावली-संकलन के संबंध में भी प्रतिसूचना आमंत्रित की गई, ताकि उसे पीएफआरडीए को भेजा जा सके।

(vii)

पटना, बिहार में नवम्बर 2014 में पेंशन संग्राहक फोरम (दूसरी बैठक) <रिपोर्ट>

 

पेंशन संग्राहकों की दूसरी बैठक नवम्बर 28, 2014 को पटना में आयोजित की गई। इसकी मेजबानी सेंटर फॉर डेवलपमेंट ओरिएंटेशन ट्रेनिंग (सीडॉट) ने किया। बैठक के प्रारंभ में कार्य-सूची प्रस्तुत की गई। साथ ही, संग्राहक फोरम के उद्देश्य भी बताए गए। साथी संग्राहकों के साथ-साथ, इस बैठक में पेंशन निधि विनियामक विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने भी भाग लिया।

कैशपर माइक्रोक्रेडिट, बंधन फाइनैंशियल सर्विसेज और सहज ई-विलेज के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने संस्थागत मॉडल पीएफआरडीए की एनपीएस-लाइट योजना के लिए प्रस्तुत किए। पीएफआरडीए के प्रतिनिधि ने फोरम को प्रणाली संबंधी पहलकदमियों की जानकारी दी, जैसे ई-प्राण कार्ड निकालना, स्वावलंबन आवेदन फॉर्म का सरलीकरण, ई-पासबुक की अवधारणा आदि। उन्होंने उत्पाद, प्रक्रियाओं तथा सेवा-प्रदायगी के बारे में प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। फोरम को सूचित किया गया कि पीएफआरडीए और संग्राहकों से मिली प्रतिसूचनाओं को शामिल करते हुए, सूक्ष्म पेंशन नियम-संकलन को अंतिम रूप दिया जा चुका है। उसे हिन्दी में अनुवाद किया जा रहा है, ताकि उसे इस्तेमाल करने में आसानी रहे। यह दस्तावेज़ संग्राहकों में परिचालित किया जाएगा।

(viii)

Thematic Roundtable On “ Credit Bureau System for SHG Data Reporting in Bhubaneswar April 20, 2015 <Report>

 

The need for a credit bureau system for microfinance in India was triggered mainly by two factors:
(1) Regulatory Changes brought in by RBI allowing MFIs to register as NBFC-MFIs and making it mandatory for them to register with at least one Credit Information Centre (CIC) and
(2) the strong need in the sector to know about the other liabilities of its borrowers and their performance on that.
Though Self Help Group - Bank Linkage Programme (SHG-BLP) has already demonstrated as one of the most potential channels of microfinance-to facilitate access to finance for millions of poor clients in India, still it is facing a few issues and challenges. Realizing the need and importance of it, PSIG-SIDBI in collaborations with other key stakeholders including Banks, RRBs, Credit Bureau agencies etc. is planning to undertake a pilot initiative to systematically capture the SHG data including-both of the groups and individual members and share that with any established credit bureau system for generating appropriate credit based information and make that available to institutional lenders for reference. The outcome of the pilot initiatives will be shared with all the key stakeholders. With a view to have a wider and collective consultation, PSIG organized a thematic workshop on “Credit Bureau System for SHG Data Reporting”. The event was participated by Banks, Microfinance Institutions, SHG promoting institutions, Business Correspondents (BCs) and BC Network Managers (BCNMs), Credit Bureau, Technical agencies, UNDP, DFID, Government of Odisha (GoO) representatives and other organisations. The key objectives of the Roundtable were to; Share the experiences and lessons learnt from microfinance credit data reporting by MFIs, facilitate deliberations on the feasibility & challenges of capturing/reporting SHG data by credit bureau and solicit suggestions for way forward to integrate or create a Credit Bureau system for the SHG channel.

(ix)

(ix) Pension Aggregator’s Forum ( 3rd meeting ) in Patna, Bihar in April 24, 2015 <Report>

 

The third meeting for Aggregator’s Forum, Bihar was organized on 24th of April, 2015 at Madhya Bihar Gramin Bank, one of the members of the forum in Patna. It was attended by 17 representatives of 10 aggregators (out of 13), PSIG SIDBI and ACCESS ASSIST state team. The meeting was organised to discuss the recently announced new initiative- Atal Pension Yojana (APY) in the Budget Speech (2015-16). Meeting was called to receive suggestions from the aggregators, which can be forwarded to PFRDA to incorporate in guidelines of APY to make it clear on merger of Swavalamban scheme with APY and its effective implementation. During the meeting, aggregators gave their suggestions and raised the points which need more clarity in guidelines of APY. Major discussion points were clarity over merger of Swavalamban scheme in APY; withdrawal procedure; incentive of aggregators; role of different stakeholders; promotion of integrated products etc. Proceeding of the meeting have been shared with PFRDA to incorporate suggestions of aggregators in guideline of APY.

(x)

Roundtable with Business Correspondent Organizations, Bihar in August 2015 <attachment>

 

Business Correspondents are the agents to carry various financial inclusion products including savings, credit, insurance and other related government schemes to the bottom of the pyramid. Accordingly, it is imperative to understand the issues and challenges faced by BCAs in implementing the government social security schemes. The roundtable deliberated on the role of BC organization and how PSIG can help through its advocacy component to make the path smoother for BC in implementing these schemes and help in achieving total FI. BC organizations unanimously said that there is vast need of financial literacy at ground level and PSIG can pitch in to generate awareness. Also, training of BCAs was a key issue which emerged out of the roundtable, so as to enable the BCA’s to deliver services efficiently.

(xi)

Regional Lenders Forum Meeting, UP in October, 2015 <attachment>

 

With the revival of the micro finance sector, it was felt pertinent to create a common platform for lenders to come together and discuss the issues and challenges being faced by them to fund the debt requirements of the industry. Accordingly, it was felt that one of the key interventions taken in this regard was the formation of the “Lender’s Forum” to promote transparent, responsible and commercially sustainable industry practices and code of conduct so as to better safeguard the interest of the poor clients . Given the fact that adequate and timely funding support plays a critical role for the growth and sustainability of microfinance programs the main objectives of the regional level lender’s forum meetings is aligned with the national agenda with a main focus on promoting investments in the MFI sector.

(xii)

Orientation Programme on “Atal Pension Yojana (APY)”, Bihar in October 2015 <attachment>

 

To successfully roll out and implement the government schemes to the poorest and the vulnerable, synergies have to be attained with the key stakeholders say banks/MFIs/NGOs/BCs required for mobilizing subscribers under such schemes. It has been felt during discussions on various forums that there has generally been lack of information and awareness on such products which has in turn resulted in its low off-take. On one hand where it is essential that the subscribers are sentitised and informed about the scheme details, benefits etc, accordingly, on the other hand the key players should also be aware about the scheme guidelines, exit processes, eligibility criteria etc.

(xiii)

Regional Lenders’ Forum, Odisha in November 2015 <attachment>

 

Considering the demand from bankers as well as MFIs operating in Odisha, need was felt to built a common forum where bankers, MFIs and other lending agencies could interact. Accordingly, the 1st Regional Lenders Forum meeting was organized in Odisha in November 2015. Adequate and timely funding support plays a critical role for the growth and sustainability of microfinance program and facilitates greater financial inclusion in the process. PSIG felt a state-wide requirement for having such forums so as to discuss and understand the fund requirements of the MFI players in that region. The participants for the included representatives from the State Bank of India, Corporation Bank, Bank of India, Indian Bank, DCB; Rating Agency - Care Ratings; High Mark Credit Bureau, Dia Vikas and regional MFIs operating in that region. Bankers desired that such regional level forums should be held from time to time in order to bridge the demand supply gap of credit as well as information exchange between bankers.

(xiv)

Orientation Programme on Atal Pension Yojana (APY), Damoh, MP in November 2015 <attachment>

 

As part of the PSIG programme, a district level Atal pension Yojana orientation (APY)orientation programme was organised in Damoh district at the Zila Panchayat office. Damoh district was chosen, in consultation with SBI, as this district is one of the low APY enrollment districts. The orientation programme was conducted in partnership with Centum Training Institute (a partner agency of PFRDA for conducting APY orientation programme). The workshop was attended by various stakeholders such as from Senior Government officials like Damoh (Upper Collector) and officials from SRLM, Dept. of Social Justice, Dept. of Women & Child Development, Labour Dept. and professors from Government PG colleges.

(xv)

Orientation Programme on Atal Pension Yojana (APY), Bhopal in November 2015 <attachment>

 

With the mandate to sensitise and create stakeholders awareness towards dispensation of APY, similar orientation programmes have been held at various PSIG states from time to time. On such programme was held in Bhopal in November 2015. The orientation featured presentation on National Pension Scheme (NPS) and APY by Pension Fund Regulatory Development Authority (PFRDA) and Centum Training Institute (a partner agency of PFRDA for conducting APY orientation programme). The workshop was attended by various officials from PSU Banks, Private Banks, Regional Rural Banks (RRBs) & Cooperative Banks, Departments, NGOs and some MFIs.

(xvi)

Odisha Financial Inclusion Conclave, November 2015 <attachment>

 

The Odisha Financial Inclusion Conclave is one of the initiatives under PSIG to bring under one roof various stakeholders from NABARD, commercial banks, Senior State Development Officials and representatives from SLBCs, MFIs, RUDSETI, Srei Sahaj etc. Discussions were deliberated around the SHG movement in Odisha, the importance of Financial Literacy Centers (FLC) and how their existing structures could be leveraged to educate the poor clients about savings, credit, insurance etc. Also, discussions were centered around the fact, that Odisha being an underdeveloped state, concert efforts should be put on extending FL measures to the tribal regions wherein a direct intervention of some kind is needed with the help of community members, etc.

(xvii)

Orientation Workshop on Atal Pension Yojana, Uttar Pradesh in January 2016 <attachment>

 

A State level and two district level orientation programme on APY were organized in Lucknow, Rai Bareily & Rampur on 19th, 22nd, & 28th January-2016 respectively, which was attended by 122 participants from different banks (Private, National, RRBs and Cooperative Bank), MFIs, & aggregators. The orientation was jointly held in co-ordination with Centum Learning (a partner agency of PFRDA for conducting APY orientation programme). Discussions were focused around importance of insurance and the basic product details of NPS & APY say their dispensation, benefits, exit criteria etc.

(xviii)

Orientation Programme on Atal Pension Yojana, Bhubaneshwar & Baripada, Odisha in February 2016 <attachment><attachment>

 

The orientation programme was organized in collaboration with Centum Learning (a partner agency of PFRDA for conducting APY orientation programme). The discussions were lead by Sri Bishwanath Lal, Lead District Manager, State Bank of India, Khurda, Block Development Officer of Baripada, Deputy District Manager, NABARD and PSIG Officials. The key mandate of such focused orientations programmes has been to familiarise & discuss the key issues and challenges faced by the Bankers while executing APY on ground level. GM, RBI also participated in the discussions.

(xix)

Regional Lender’s Forum, Odisha in March 2016 <attachment>

 

This is the 2nd Regional Lenders Forum meeting in Odisha. Odisha being the hub of small and mid-sized MFIs as well as multiple NGOs/development organizations, holding Regional Lenders Forum has greatly facilitated in channelizing fund flow to such entities especially the micro finance sector. It has also helped in addressing the inhibitions and queries of bankers’ w.r.t MFI lending and broadens their perspective by way of cross bank interactions. One of the key take away emerged from the lender’s forum was a need to organize additional sensitization/exposure programs for bankers on MFI operations and appraisal process, holding banker-MFI interface meetings and similar advocacy with the HO departments of commercial banks.

(xx)

Sensitization programme on Atal Pension Yojana at Gaya and Begusarai, Bihar in January & February 2016 <attachment>

 

As a follow up of the last orientation programme on APY in Patna, Bihar in November 2015, another sensitization programme was held at Gaya & Begusarai in partnership with Centum Learning (a partner agency of PFRDA for conducting APY orientation programme). The programme was attended in large noumbers by around 30 stakeholders in Gaya and 50 participants in Begusarai which included commercial banks, RRBs, District Agriculture Officer, NABARD and DHAN Foundation.

(xxi)

Roundtable on MUDRA Yojana: Status, Opportunities & Challenges, Bihar in March 2016 <attachment>

 

The PMMY is an ambitious project of the GOI to extend loan services to those entrepreneurs who lack capital support and have been left out from the main stream banking. During various state level interactions, SFIFs, consultative meets etc, demand was continuously felt from the stakeholders to have a detailed roundtable discussion on the various aspects of MUDRA Yojana. Various stakeholders from pointed out towards a lack of clarity in terms of interest rate, Credit Guarantee funds, support from MUDRA bank to institutions etc. Keeping this as the background a Roundtable on MUDRA Yojana, along with MUDRA Bank’s participation was organised for bankers, government officials and other implementing agencies in Patna.

(घ) राज्य वित्तीय समावेशन फोरम (एसएफआईएफ):

राज्य वित्तीय समावेशन फोरम के बारे में

पीएसआईजी कार्यक्रम की एक मुख पहल है- सभी चार राज्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर वित्त तक पहुँच में वृद्धि करने के लिए पैरोकारी के समुचित प्रयास करना। इस उद्देश्य से बिहार, ओड़िशा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बहु-हितधारक पीएसआईजी राज्य वित्तीय समावेशन फोरम (एसएफआईएफ) की स्थापना की गई है।

एसएफआईएफ के मुख्य उद्देश्य निम्नवत हैं:

  • राज्य स्तर पर सभी हितधारकों के मध्य समन्वय और सामंजस्य को बढ़ावा देना, ताकि राज्य में वित्तीय समावेशन के लिए सक्षमताकारी वातावरण निर्मित हो सके।

  • राज्य में वित्तीय समावेशन की प्रगति एवं निष्पादन-संकेतकों का आकलन करना।

  • सरकार एवं अन्य एजेंसियों द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों के मध्य तालमेल कायम करना, ताकि किए गए निवेश के प्रभाव में अधिकतम वृद्धि की जा सके।

  • वित्तीय समावेशन से संबंधित कठिनाइयों और समस्याओं (विधिक एवं विनियामक आयामों व परिचालन संबंधी बाधाओं सहित) की पहचान करना और सहयोगात्मक समाधान सुझाना।

  • पैरोकारी के मुख्य मुद्दों का मूल्यांकन करना और उन्हें राष्ट्र-स्तरीय चिन्तन दल को अग्रेषित करना, ताकि वे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उठा सकें।

  • राज्य में वित्तीय समावेशन के अंतर्गत नई और नवोन्मेषी गतिविधियों की संभावनाओं का पता लगाना।

(i) बिहार

एसएफआईएफ की निम्नलिखित बैठकें आयोजित हुई हैं:

  • पहली एसएफआईएफ बैठक- जनवरी 2014 में <रिपोर्ट>

  • दूसरी एसएफआईएफ बैठक- मार्च 2014 में <रिपोर्ट>

  • तीसरी एसएफआईएफ बैठक- जुलाई 2014 में <रिपोर्ट>

  • चौथी एसएफआईएफ बैठक- सितंबर 2014 में <रिपोर्ट>

  • पाँचवी एसएफआईएफ बैठक- दिसंबर 2014 में <रिपोर्ट>

  • छठवी एसएफआईएफ बैठक- मार्च 2015 में <रिपोर्ट>

  • सातवी एसएफआईएफ बैठक- जुलाई 2015 में <रिपोर्ट>

  • आठवी एसएफआईएफ बैठक- अक्टूबर 2015 में <रिपोर्ट>

  • नौवी एसएफआईएफ बैठक- फरवरी 2016 में <रिपोर्ट>

(ii) MP

The following SFIF meetings have been held

  • पहली एसएफआईएफ बैठक- नवंबर 2014 में <रिपोर्ट>

  • दूसरी एसएफआईएफ बैठक- फरवरी 2015 में <रिपोर्ट>

  • तीसरी एसएफआईएफ बैठक- सितंबर 2015 में <रिपोर्ट>

  • चौथी एसएफआईएफ बैठक- फरवरी 2016 में <रिपोर्ट>

(iii) Odisha

The following SFIF meetings have been held:

(iv) UP

The following SFIF meetings have been held:

(e) विषय-संबंधी प्रपत्र

  1. Call for an Inclusive Banking Structure for India by 2019, Fifty Years after Bank Nationalization by Shri Vijay Mahajan - October 2013 <Report>

  2.  Extant Regulation of Microfinance sector – a discussion paper by Shri N Srinivasan - April 2014 <Report>

  3.  Local Area Banks in India: A Review by Prof. M S Sriram - June 2014 <report>

  4.  Regional Rural Banks and Financial Inclusion: Policy Imperatives <report>

  5.  Crowd funding in Micro finance in India- Issues, Challenges and Opportunities

  6.  Scope and Limitations for Product Development and Offering Diversified Products at Scale in Microfinance<report>

  7. Outreach of Microfinance Finance Institutions in four focus states <report>

  8.  Dipstick Study on Financial Literacy Centres Status, Constraints & Way forward in Bihar, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh and Odisha <report>

  9. Flyer on sectorial initiatives under Financial Inclusion and Responsible Finance. <report>

  10. Policy paper on legal and regulatory framework for micro finance institutions in India. <report>

  11. Policy paper on Micro Finance: Promise of Financial Inclusion. <report>

  12. Flyer on Challenges ahead or Self Help Group (SHG) and Movement. <report>

  13. The Bhart Micro Finance Report - 2015. <report>

  14. The Bhart Micro Finance Report - 2016. <Report>

(च) अध्‍ययन व अनुसंधान :

 

संपन्‍न

(i) पीएसआईजी राज्‍यों में अल्‍पवित्‍त गतिविधि पर अध्‍ययन – हाई मार्क क्रेडिट इंफॉर्मेशन सर्विसेज़ द्वारा - मार्च 2014

अल्‍पवित्‍त गतिविधि की पहुंच की प्रभावकारिता, विविध उधार की सीमा आदि को मापने हेतु तथा अल्‍पवित्‍त संस्‍थाओं के संसाधनों को न्‍यूनतम पहुंच वाले जिलों तहसीलों तक चैनलीकृत करने के उद्देश्‍य से, हाईमार्क के साथ “पीएसआईजी राज्‍यों में अल्‍पवित्‍त गतिविधि पर अध्‍ययन” करने हेतु एक करार किया गया है । इस अध्‍ययन में विभिन्‍न मानदंडों को शामिल किया जा रहा है, जैसे उधारकर्ता हेतु संविभाग विश्‍लेषण व खाते के स्‍तर पर गतिविधि, जिला व तालुक स्‍तरों पर उपस्थिति व कार्यनिष्‍पादन रिपोर्ट एवं उत्‍तरप्रदेश, मध्‍यप्रदेश, ओडिशा व बिहार के पीएसआईजी राज्‍यों में विज़ुअल हीट मैप्‍स । हाईमार्क ने भारत में अल्‍पवित्‍त ‍यूरो की शुरूआत की थी तथा यह विश्‍व के बड़े अल्‍पवित्‍त ब्‍यूरो डाटाबेस में से एक का परिचालन करता है ।

 

(ii) बिहार में व्‍यवसाय संवाददाता मॉडल – अवरोध एवं माइक्रोसेव द्वारा इनका समाधान - सितंबर 2014 <रिपोर्ट>

पीएसआईजी को उत्‍तरप्रदेश, मध्‍यप्रदेश, बिहार व ओडिशा के अल्‍पसेवित क्षेत्रों में वित्‍तीय सेवाओं की पहुंच में सुधार लाने का अधिदेश प्राप्‍त है । यह कार्यक्रम वित्‍तीय समावेशन के सभी चैनलों के साथ कार्य करने हेतु लक्षित है । पीएसआईजी कार्यक्रम प्रयासों से व्‍यवसाय संवाददाता मॉडल की प्रभावकारिता में सुधार आने तथा इन प्रयासों के आसपास ज्ञानक्षेत्र में वृद्धि होने की आशा है ।
इसे ध्‍यान में रखते हुए, एक राज्‍य के परिप्रेक्ष्‍य में इस मॉडल की प्रभावकारिता के आसपास मौजूदा ज्ञानक्षेत्र में सुधार, इसकी प्रभावकारिता बढ़ाने हेतु संभावित प्रयास पर सिफारिश देने तथा इसके नीतिगत पक्षपोषण प्रयासों को मजबूत बनाने हेतु एक अध्‍ययन किए जाने का विचार है । माइक्रोसेव का चयन “बिहार में व्‍यवसाय संवाददाता मॉडल का एक ड्रिलडाउन अध्‍ययन” करने हेतु किया गया है, जिसमें बिहार राज्‍य में मौजूदा व्‍यवसाय संवाददाता मॉडलों की ड्रिलडान मामला अध्‍ययनों का संकलन, प्रमुख व्‍यवसाय संवाददाताओं का एक विश्‍लेषण करना तथा आशाजनक व्‍यवसाय संवाददाताओं का विश्‍लेषण किया जाएगा तथा साथ ही, भारत में व्‍यवसाय संवाददाता मॉडल की सफलता में बाधक प्रमुख तत्‍वों का अध्‍ययन होगा । यह अध्‍ययन अब संपन्‍न हो गया है तथा बिहार के माननीय वित्‍त मंत्री द्वारा 18 सितंबर, 2014 को वितरित कर दिया गया है ।

 

(iii) ध्‍येय दस्‍तावेज

बिहार : वित्‍तीय समावेशन की स्थिति एवं भावी रास्‍ता : बिहार 2012-2017 <रिपोर्ट>

ओडिशा : वित्‍तीय समावेशन की स्थिति एवं भावी रास्‍ता : ओडिशा 2012-2017 <रिपोर्ट>

उत्‍तर प्रदेश : वित्‍तीय समावेशन की स्थिति एवं भावी रास्‍ता : उत्‍तर प्रदेश 2012-2017 <रिपोर्ट>

मध्‍यप्रदेश : वित्‍तीय समावेशन की स्थिति एवं भावी रास्‍ता : मध्‍यप्रदेश 2012-2017 <रिपोर्ट>

 

(iv) मौजूदा व्‍यवसाय संवाददाताओं एवं मध्‍यप्रदेश में व्‍यवसाय संवाददाता मॉडलों पर ड्रिलडाउन अध्‍ययनों का संकलन – प्राइसवाटरहाउसकूपर्स प्रा. लि. द्वारा <रिपोर्ट>

पीएसआईजी कार्यक्रम के प्रयासों से व्‍यवसाय संवाददाता मॉडल की प्रभावकारिता में वृद्धि की आशा है तथा इससे इन प्रयासों के ज्ञान में भी वृद्धि होती है । इसे ध्‍यान में रखते हुए, एक अध्‍ययन कराया जा रहा है, जिससे एक राज्‍य के संदर्भ में इस मॉडल की प्रभावकारिता के संबंध में मौजूदा ज्ञान में सुधार लाने, इसकी प्रभावकारिता को बढ़ाने हेतु संभावित उपायों पर सिफारिशें देने तथा इसके नीतिगत पक्षपोषण प्रयासों को मजबूत बनाने का कार्य किया जा सके । पीएसआईजी ने, संस्‍थागत वित्‍त निदेशालय, मध्‍यप्रदेश शासन एवं प्राइसवाटरहाउसकूपर्स के सहयोग से “मौजूदा व्‍यवसाय संवाददाताओं एवं मध्‍यप्रदेश में व्‍यवसाय संवाददाता मॉडलों पर ड्रिलडाउन नमूना अध्‍ययनों” पर एक अध्‍ययन शुरू किया है । यह अध्‍ययन जून 2015 तक संपन्‍न होने की संभावना है ।

 

(v) अल्‍पवित्‍त संस्‍थाओं द्वारा नैगम संचालन कार्यव्‍यवहार पर माइक्रोसेव द्वारा अध्‍ययन <रिपोर्ट>

पीएसआईजी कार्यक्रम के नीतिगत परिणाम के अंतर्गत, अग्रणी सार्वजनिक/निजी क्षेत्र के बैंकों के जोखिम प्रमुखों, अल्‍पवित्‍त संस्‍थाओं एवं रेटिंग एजेंसियों के साथ कई चचाएं हुईं, जिनके दौरान अल्‍पवित्‍त संस्‍थाओं से संबद्ध जोखिम अवधारणाओं को समझा गया तथा पाया गया कि प्रमुख जोखिम राजनीतिक, विनियामक एवं संचालन संबंधी थे ।
इन हिस्‍सेदारों ने संचालन को एक प्रमुख जोखिम इंगित किया, जो अल्‍पवित्‍त संस्‍थाओं में अ‍पेक्षाकृत ज्‍यादा निवेश में बाधक है । संचालन, उत्‍तरदायी वित्‍त फोरम में भी एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में सामने आया है ।
यह सुझाव दिया गया था कि अभिशासन के क्षेत्र की मौजूदा पद्धतियों पर एक अध्ययन / सर्वेक्षण किया जाए, ताकि उनकी स्थिति की समझा जा सके और समुचित प्रयासों की योजना बनाई जा सके। तदनुसार, अल्प वित्त संस्थाओं में प्रचलित अभिशासन पद्धतियों पर एक अध्ययन आरंभ किया गया था। अध्ययन चल रहा है और आशा है कि रिपोर्ट फरवरी / मार्च 2014 में जारी हो जाएगी।

 

(vi) फिन स्कोप सर्वेक्षण

पीएसआईजी ने यह परिकल्पना की है कि फिन मार्क ट्रस्ट (एफएमटी), जोहन्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका से एक फिन स्कोप सर्वेक्षण कराया जाए। एफएमटी एक गैर-लाभकारी स्वतंत्र ट्रस्ट है, जिसका निधीयन प्रमुखतः डीएफआईडी द्वारा किया जाता है और जो मार्च 2002 में स्थापित हुआ था। फिन स्कोप सर्वेक्षण एक अलग-अलग ग्राहक आधारित सर्वेक्षण है, जो फिन मार्क ट्रस्ट द्वारा आरंभ और विकसित किया गया है। यह दुनिया भर में वित्तीय सेवा क्षेत्र के माँग पक्ष के मुद्दों पर सर्वाधिक विश्वसनीय अध्ययनों में से एक माना जाता है और यह इस बात की अच्छी समझ पैदा करता है कि निम्न आय वर्ग के उपभोक्ता किस तरह अपने वित्तीय जीवन का प्रबंधन करते हैं। मार्च 2014 में सर्वेक्षण करने के लिए एफएमटी के साथ संविदा की गई है। आशा है कि यह सर्वेक्षण सितंबर 2015 तक पूरा हो जाएगा।

(vii) Voices of Microfinance  Clients <attachment>

(viii) Microfinance in India - Is overindebtedness a worry? <attachment>

(g) राज्यवार तिमाही समाचार बुलेटिन

विभिन्न नीति पक्षपोषण प्रयासों के एक भाग के रूप में तिमाही बुलेटिन संकलित और प्रकाशित किए गए हैं, जो राज्य के महत्वपूर्ण वित्तीय समावेशन संकेतकों पर निगाह रखते हैं और हितधारकों के बीच जानकारी का आदान प्रदान करते हैं।

बिहार

1. फरवरी 2014 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

2. जून 2014 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

3. सितंबर 2014 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

4. दिसंबर 2014 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन < संलग्नक>

5. मार्च 2015 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

6. जून 2015 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

7. सितंबर 2015 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

8. दिसंबर 2015 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

9. मार्च 2016 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

मध्य प्रदेश

1. सितंबर 2014 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

2. फरवरी 2015 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

3. सितंबर 2015 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन

4. दिसंबर 2015 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

5. मार्च 2016 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

ओडिशा

1. फरवरी 2014 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

2. जून 2014 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

3. सितंबर 2014 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

4. दिसंबर 2014 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

5. मार्च 2015 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

6. जून 2015 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

7. सितंबर 2015 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन

8. दिसंबर 2015 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

9. मार्च 2016 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

उत्तर प्रदेश

1. अक्टूबर 2014 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

2. मार्च 2015 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

3. जून 2015 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

4. सितंबर 2015 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

5. दिसंबर 2015 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

6. मार्च 2016 हेतु समावेशी वित्त बुलेटिन <संलग्नक>

ज्ञान श्रृंखला

ज्ञान श्रृंखला 1 - महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हैंडबुक <Attachment>

ज्ञान श्रृंखला 2 - निर्धन से प्रगतिशील तक - डिकोडिंग द लर्निंग्स <Attachment>

ज्ञान श्रृंखला 3 - संपोषणीय कार्यनीतियाँ वित्तीय समावेशन से स्वावलंबन <Attachment>