सिडबी 2.0

पर्यावलोकन

विज़न 2.0

एमएसएमई परिवेश में, अखिल भारतीय वित्तीय संस्था के रूप में उभरते हुए बैंक को एकीकृत ऋणदाता और विकास के समर्थक की भूमिका में रूपांतरित करना और वैचारिक नेतृत्व प्रदान करते हुए क्रेडिट-प्लस अवधारणा को अपनाते हुए गुणक प्रभाव बनाकर,एक समूहक के रूप में कार्य करना।

सिडबी 2.0

एमएसई के विकास हेतु समन्वित दृष्टिकोण

1990 में अपने स्थापना के बाद से, सिडबी अपने एकीकृत, अभिनव और समावेशी दृष्टिकोण के जरिये समाज के विभिन्न स्तरों पर नागरिकों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। चाहे वह पारंपरिक घरेलू उद्योग हों, लघु उद्यम हों, पिरामिड के निचले पायदान के उद्यमी हों, या फिर मध्यम उद्यम से लेकर उच्चस्तरीय ज्ञान-आधारित और निर्यात संवर्द्धन उद्यम हों, सिडबी ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एमएसई क्षेत्र के 360 लाख लोगों के जीवन को अपने विभिन्न ऋण और विकासपरक उपायों के माध्यम से प्रभावित किया है।

सिडबी विज़न 2.0, सिडबी की ओर से एक रणनीतिक पहल है। इसका लक्ष्य अखिल भारतीय वित्तीय संस्था के तौर पर अपनी वर्तमान भूमिका का रूपांतरण कर इस प्रयत्न को गति प्रदान करना है, जिसके माध्यम से भारतीय एमएसई के लिए एक एकीकृत ऋण और विकास सहायता पारितंत्र बनाया जा सके और इस प्रकार उनकी समावेशी संवृद्धि का संवर्द्धन किया जा सके।

यह पहल एमएसई की ऋण और गैर-ऋण दोनों ज़रूरतों को पूरा करने के लिए समर्पित है, ताकि वे विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी व्यवसाय इकाई बन सकें। सिडबी 2.0 की रूपरेखा तीन स्तंभों अर्थात् लाभ (आर्थिक), लोग (समाज) एवं ग्रह (पर्यावरण) के आधार पर, भारत में एमएसई क्षेत्र के दीर्घकालिक और पर्यावरण-अनुकूल विकास के लिए तैयार की गई है।

Broad pillars of SIDBI Vision 2.0

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