पारितंत्र

देश में एमएसएमई क्षेत्र के विकास और समृद्धि के लिए सहायक वित्तीय बुनियादी ढांचे का निर्माण करने के लिए, सिडबी ने एक मजबूत सहयोगी और सहायक कंपनियों के नेटवर्क के निर्माण के जरिए सिडबी प्लस दृष्टिकोण और प्रचारित संस्थानों को अपना कर समावेशी विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।

इन सहायक कंपनियों को सोच समझकर वैविध्यपूर्ण बनाया गया है ताकि वे एमएसएमई एवं स्टार्ट अप्स की पारंपरिक और गैर पारंपरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए सेवाएं प्रदान करें। इनमें से कुछ सिडबी के स्वतंत्र प्रयास हैं, जबकि कई प्रयास अन्य राज्यों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ गठजोड़ के माध्यम से किए गए हैं, इन सभी प्रयासों का एक ही उद्देश्य है कि सभी शामिल हितधारकों के लिए अधिकतम वित्तीय, सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ मिल सके और विकास को गति मिले।

Ecosystem

मुद्रा

माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी लि. (मुद्रा)

माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी लि. (मुद्रा) की स्थापना 08 अप्रैल 2015 को हुई। यह सिडबी के पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था है। इसका उद्देश्य देश के ‘वित्त-विहीन सूक्ष्म उद्यमों का निधीयन करना’ है। मुद्रा पुनर्वित्त सहायता योजना के माध्यम से बैंकों, अल्प वित्त संस्थाओँ (एमएफआई), गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों तथा अन्य पात्र ऋणदात्री संस्थाओं को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराता है, ताकि वे उन सूक्ष्म/लघु व्यवसाय इकाइयों को उधार दे सकें, जो विनिर्माण, व्यापार, सेवा क्षेत्र की गतिविधियों तथा कृषि की अनुषंगी गतिविधियों एवं अन्य पात्र आय अर्जन गतिविधियों में संलग्न हैं।

मुद्रा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना पोर्टल भी संभालता है, जिसपर ऋणदात्री संस्थाएं प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के क्रियान्वयन संबंधी अपने परिचालन डाटा अपलोड करती हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के क्रियान्वयन की प्रगति की आवधिक समीक्षा अखिल भारतीय स्तर पर मुद्रा लि. और वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा तथा राज्य स्तर पर राज्य-स्तरीय बैंकर समिति द्वारा की जाती है।

वर्तमान में मुद्रा की प्राधिकृत पूँजी `. 5,000 करोड़ तथा प्रदत्त पूँजी `. 1,675.93 करोड़ है। यह बैंकों, गैरबैंकिंग वित्तीय कंपनियों, अल्प वित्त संस्थाओं तथा राज्य/क्षेत्रीय स्तर की अन्य ऋणदात्री संस्थाओं के साथ घनिष्ठतापूर्वक काम करता है, ताकि देश के बढ़ते हुए सूक्ष्म उद्यम क्षेत्र को अल्प वित्त सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

मुद्रा का प्रभाव:

  • मुद्रा की पुनर्वित्त सहायता से ऋणदात्री संस्थाओं को किफायती दर पर निधियाँ उपलब्ध हुई हैं, जिससे वे प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत पात्र आय-अर्जक गतिविधियों के लिए `. 10 लाख तक के अपने उधार का दायरा बढ़ा सकी हैं। साथ ही, इससे अंतिम लाभग्राहियों की ऋण-लागत को कम करने में भी मदद मिली है।

  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के ज़रिए ज़मीनी स्तर पर ऋणप्रदायगी की बारीकी से निगरानी के फलस्वरूप 31 मार्च 2022 तक 34.93 करोड़ उधार-खातों में रु. 18.91 लाख करोड़ का संचयी ऋण दिया जा सका है। इनमें से 68% उधारकर्ता महिलाएं, 21% नये ऋण खाते तथा 51% अजा/अजजा/अपि वर्ग से संबंधित रहे।

  • मुद्रा ने विभिन्न अल्प वित्त संस्थाओं, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, अनुसूचित वाणिज्य बैंकों तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों व लघु वित्त बैंकों को 31 मार्च 2022 तक रु.53,051 करोड़ का पुनर्वित्त संवितरित किया है।

अधिक विवरण के लिए देखें http://www.mudra.org.in/

एसवीसीएल

सिडबी वेंचर कैपिटल लिमिटेड (एसवीसीएल)

सिडबी वेंचर कैपिटल लिमिटेड (एसवीसीएल) सिडबी के पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था है। इसकी स्थापना जुलाई 1999 में की गयी। यह उद्यम पूँजी निधियों (वीसीएफ) के प्रबन्धन के लिए गठित एक निवेश प्रबंधन कंपनी है। स्थापना के समय से ही एसवीसीएल विभिन्न क्षेत्रों के सुपात्र और लाभप्रद सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को संवृद्धि पूँजी उपलब्ध कराती रही है। एसवीसीएल के प्रबन्धन वाली निधियों ने अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में बहुमूल्य संवृद्धि को गति पैदा करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

एसवीसीएल का प्रभाव:

  • एसवीसीएल के प्रबन्धन वाली निधियों ने विभिन्न क्षेत्रों जैसे विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, सेवा आदि के एमएसएमई को सहायता उपलब्ध कराई है।

  • इन निवेशिती कंपनियों अथवा क्षेत्रों में से अधिकतर में एसवीसीएल ने पहला निवेशक बनकर अग्रणी भूमिका निभाई है और अन्य निधियों के सामने अपना अनुकरण करने तथा सफल निवेशिती के विकास हेतु मदद करने का उदाहरण प्रस्तुत किया है। परवर्ती चक्रों में बड़े निवेशकों/ निधियों ने एसवीसीएल निवेशिती कंपनियों में निवेश किया है।

  • अधिकतर एसवीसीएल निधियों का ध्यान उल्लेखनीय रूप से उन विनिर्माण व्यवसायों पर केन्द्रित है, जिन्हें आम तौर पर इक्विटी पूँजी नहीं मिल पाती।

  • जिन कंपनियों में एसवीसीएल की निधियों का निवेश किया गया है, उनमें से कई विकसित होकर काफी सम्मानजनक आकार की हो गयी हैं।

  • नए एआईएफ दिशानिर्देशों के अंतर्गत, समृद्धि निधि सामाजिक प्रभाव वाली पहली निधि थी। इसने अनेक प्रकार के क्षेत्रों जैसे वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य-रक्षा, पेयजल, जैव खाद्य, कृषि-प्रसंस्करण तथा स्वच्छ ऊर्जा आदि की कंपनियों की सहायता की है।

  • समृद्धि निधि के ज़रिए एसवीसीएल ने 5 अल्प वित्त संस्थाओं में निवेश किया है। उनमें से दो रूपान्तरित होकर लघु वित्त बैंक बन चुकी हैं। इन अल्प वित्त संस्थाओं तथा लघु वित्त बैंकों ने दूर-दराज स्थित भौगोलिक स्थानों में वित्तीय समावेशन और खास तौर से गरीब ग्रामीण महिलाओं के वित्तीय समावेशन में मदद की है।

  • एसवीसीएल ने अब तक 130 निवेश तथा 85 से अधिक बहिर्गमन किए हैं। इस प्रकार उसने पारंपरिक क्षेत्रों जैसे विनिर्माण और वस्त्रोद्योग के विकास में उल्लेखनीय योगदान किया है। साथ ही, उसने स्वास्थ्य-रक्षा, लॉजिस्टिक्स, शिक्षा, जल आदि क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी-आधारित नये स्टार्ट-अप्स, सामाजिक उद्यमों, महिला उद्यमियों तथा नवोन्मेषी उत्पादों और सेवा-उद्यमों की लहर का भी नेतृत्व किया है.

अधिक विवरण के लिए देखें http://www.sidbiventure.co.in

सीजीटीएमएसई

क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेस (सीजीटीएमएसई)

की स्थापना सन् 2000 में हुई। यह सदस्य ऋणदात्री संस्थाओं द्वारा एमएसई को प्रदान की गयी रु. 2 करोड़ की उन ऋण सुविधाओं के लिए ऋण गारंटी योजना संचालित करता है, जिनके लिए संपार्श्विक प्रतिभूति और /अथवा तृतीय पक्ष गारंटी उपलब्ध नहीं होती/आंशिक रूप से उपलब्ध होती है।

गारंटी योजना ने 31 मार्च 2022 तक संचयी रूप से रु. 3.14 लाख की ऋण-राशि के 58.59 लाख एमएसई ऋण खातों के निर्माण में मदद की है। वित्तीय वर्ष 2022 के दौरान 52% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज़ करते हुए कुल रु. 56,172 करोड़ की गारंटियाँ अनुमोदित की गयीं। सीजीटीएमई से सहायता-प्राप्त इकाइयों ने 155 लाख रोजगार सृजित किए हैं। इस योजना से लाभान्वित उद्यमियों में लगभग 14% महिलाएँ हैं। सीजीटीएमएसई से सहायता-प्राप्त इकाइयों ने निर्यात में रु. 24,033 करोड़ का योगदान किया है।

पिछले वित्तीय वर्ष में उत्साहजनक वृद्धि के अलावा हमने समय की माँग को देखते हुए कोविड की चुनौती को पूरा करने के लिए पीएमस्वनिधि और सीजीएसएसडी नामक 2 विशेष योजनाएँ भी आरम्भ कीं। सीजीएसएसडी और पीएमस्वनिधि, ये दोनों योजनाएँ उद्यमिता गतिविधि के दो सबसे महत्त्वपूर्ण घटकों को पुनरुज्जीवित करने में जुटी हैं।

परिचालनगत दक्षता में सुधार के लिए सीजीटीएमएसई ने प्रौद्योगिकी का लाभ लेते हुए ऋण गारंटी उत्पादों में प्रमुख नीतिगत बदलाव किए हैं, जैसे गारंटी कवरेज के लिए थोक व्यापार और शैक्षिक संस्थाओं को शामिल किया जाना, रु. 50 लाख से अधिक के ऋणों के लिए गारंटी कवरेज की सीमा बढ़ाकर 75% किया जाना, स्वीकृत राशि के बजाय बकाया राशि पर गारंटी शुल्क प्रभारित करना, खुदरा व्यापार को पात्र गतिविधि के रूप में शामिल करना, आंशिक संपार्श्विक प्रतिभूति की अनुमति देना, सीजीटीएमएसई की पात्र सदस्य ऋणदात्री संस्था के रूप में एनबीएफसी और फिनटेक एनबीएफसी, एसएफबी तथा अनुसूचित शहरी सहकारी बैंकों को शामिल करना।

वित्तीय वर्ष 2022 की महत्त्वपूर्ण गतिविधियाँ :

  1. परिचालन की सुगमता के उद्देश्य से सीजीटीएमएसई के अंतर्गत शामिल किए जाने के लिए थोक अपलोड सुविधा रु. 1 करोड़ तक के लिए आरम्भ की गयी।
  2. शैक्षिक संस्थाओं तथा थोक व्यापारियों को प्रदत्त ऋणों को पात्र गतिविधियों के दायरे में लाया गया।
  3. नयी योजनाएँ आरंभ करना- जैसे बैंकों व एनबीएफसी द्वारा सह-ऋणप्रदायगी के लिए गारंटी, राज्य-विशिष्ट गारंटियों के लिए राज्य सरकार के साथ सहयोग आदि।
  4. ऋण की अवधि में किसी भी समय गारंटी आवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दिया जाना।
  5. क्रेडिय गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेस (सीजीटीएमएसई) ने पात्र बैंकों व एनबीएफसी द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक के विनिर्दिष्ट सह-ऋणप्रदायगी मॉडलों के अंतर्गत सूक्ष्म एवं लघु उद्यम उधारकर्ताओं को संयुक्त रूप से प्रदान की गयी ऋण सुविधाओं के संबंध में गारंटी उपलब्ध कराने के लिए एक योजना बनायी है। इसके अंतर्गत उन पात्र ऋणों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें एमएसई क्षेत्र के पात्र उधारकर्ताओं को ऋणदात्री संस्थाओं के जोड़े ने सह-ऋणप्रदायगी व्यवस्था के अंतर्गत प्रदान किया हो।

क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर एमएसई (सीजीटीएमएसई)

  • रु. 2 करोड़ तक की ऋण सुविधाओं के संबंध में एमएसई के लिए ऋण गारंटी योजना
  • वित्तीय वर्ष 2022 की उपलब्धियाँ:
  • अनुमोदित गारंटियाँ रु. 56,172 करोड़ रहीं।
  • अनुमोदित गारंटियों की संख्या- 7,17,020
  • सीजीटीएमएसई ने रु. 3.14 लाख करोड़ के लिए 58.59 लाख गारंटियाँ अनुमोदित कीं और संचयी रूप से रु. 8,414.8 करोड़ के 3.58 लाख दावों का निपटान किया।
  • सीजीटीएमएसई से सहायता-प्राप्त इकाइयों ने 155 लाख रोजगार सृजित किए हैं।
  • सीजीटीएमएसई से सहायता-प्राप्त इकाइयों ने निर्यात में रु. 24,033 करोड़ का योगदान किया।

आरएक्सआईएल

रिसीवेबल्स एक्स्चेंज ऑफ इंडिया लि.(आरएक्सआईएल)

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और नैशनल स्टॉक एक्स्चेंज ऑफ इंडिया लि. (एनएसईएल) ने भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक तथा येस बैंक के साथ मिलकर 25 फरवरी 2016 को रिसीवेबल्स एक्स्चेंज ऑफ इंडिया लि. (आरएक्सआईएल) के अंतर्गत भारत के पहले ट्रेड्स प्लैटफॉर्म की स्थापना की।

ट्रेड्स एक ऑनलाइन प्लैटफॉर्म है, जिसपर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की प्राप्य राशियों का वित्तपोषण एक पारदर्शी नीलामी-आधारित प्रणाली के माध्यम से होता है।

आरएक्सआईएल का प्रभाव:

  • आरएक्सआईएल अपने सभी हितधारकों- एमएसएमई, नैगम क्रेताओं (जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और सरकारी विभाग भी शामिल हैं) तथा वित्तपोषकों के लिए परस्पर लाभकारी है। आरएक्सआईएल ट्रेड्स प्लैटफॉर्म पर लेन-देन पूरी तरह डिजिटल और कागज-रहित होते हैं और यह एमएसएमई प्राप्यों के त्वरित एवं समय पर भुगतान के लिए पारदर्शी बिल भुनाई प्रणाली उपलब्ध कराता है।
  • सरकार द्वारा अन्य बातों के साथ-साथ, अधिकाधिक डिजिटल भुगतान को बढावा देने और बाज़ार तक पहुँच को सुगम बनाकर एमएसएमई क्षेत्र में सुधार लाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ट्रेड्स एमएसएमई के लाभ के लिए किए गए उन उपायों में से एक है, जिनसे  वे अपेक्षाकृत कम वित्तीय-लागत पर अपने प्राप्य की समयबद्ध वसूली कर सकते हैं।
  • अपनी स्थापना से अब तक आरएक्सआईएल ट्रेड्स ने लगभग 12000 से अधिक एमएसएमई को अपने साथ जोड़ा है और ( यथा 31 अगस्त 2022 तक) `32,000 करोड़ की प्राप्य राशियों के प्रति समय पर भुगतान पाने में उनकी सहायता की है। यही नहीं, पूर्णतः डिजिटल प्लैट्फॉर्म होने के कारण आरआईएक्सएल के परिचालन निर्बाध रूप से निरंतर चलते रहते हैं। समय से मिलने वाले इस किफायती वित्त की मदद से एमएसएमई की वित्तीय लागत लगभग 50% कम हुई है। बचत की इस राशि का उपयोग व्यवसाय-विस्तार और पण्यावर्त (टर्नओवर) बढ़ाने के लिए किया गया है। आरएक्सआईएल एकमात्र ट्रेड्स प्लेटफॉर्म है जिसने ट्रेड्स प्लेटफॉर्म पर राज्य सरकार को सक्रिय किया है, जो राज्य के एमएसएमई विक्रेताओं को उनकी प्राप्तियों के खिलाफ वित्तपोषण प्राप्त करने में मदद करता है।
  • आरएक्सआईएल की योजना है कि ट्रेड्स की सुविधा का और विस्तार किया जाए तथा वित्तीय वर्ष 2024 तक भारत भर के 50,000 एमएसएमई की संवृद्धि और विकास में मदद की जाए।
  • देश में एमएसएमई का सुदृढ़ पारितंत्र विकसित करने और आत्मनिर्भर भारत (स्वावलंबी भारत) की भारत सरकार की परिकल्पना को साकार करने में योगदान के लिए आरएक्सआईएल कृतसंकल्प है।

और अधिक विवरण के लिए देखें http://www.rxil.in

ऐकुईते

एक्यूइट रेटिंग्स एंड रिसर्च लिमिटेड

एक्यूइट रेटिंग्स एंड रिसर्च लिमिटेड (www.acuite.in) प्रौद्योगिकी-सक्षम, पूर्ण-सेवा क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है। यह सिक्युरिटीज एंड एक्स्चेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) में पंजीकृत है और भारतीय रिज़र्व बैंक से मान्यता-प्राप्त है। इस कंपनी को वर्ष 2012 में बेसल-II मानदंडों के अंतर्गत बैंक ऋण रेटिंग के लिए बाह्य क्रेडिट मूल्यांकन संस्था (ईसीएआई) के रूप में भारतीय रिज़र्व बैंक से पहचान मिली। इसने देश भर में विद्यमान उद्योगों के एक व्यापक वर्ग के निकायों की विभिन्न प्रतिभूतियों, ऋण लिखतों तथा बैंक सुविधाओं के लिए 9100 से अधिक क्रेडिट रेटिंगें दी हैं। एक्यूइट बॉण्डों, बंधपत्रों, वाणिज्यिक पत्रों, सावधि जमा और निधि-आधारित तथा गैर निधि-आधारित विभिन्न बैंक सुविधाओं की रेटिंग करता है। क्रेडिट रेटिंग के अलावा आर्थिक अनुसंधान, औद्योगिक अनुसंधान, वित्तीय मॉडलिंग, रेटिंग मॉडलिंग तथा सॉफ्टवेयर अनुप्रयोगों के क्षेत्र में एक्यूइट की विशेषज्ञता है।

स्मेरा रेटिंग्स प्राइवेट लिमिटेड एक्यूइट रेटिंग्स एंड रिसर्च लि. के पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था है। स्मेरा (www.smeraonline.com) एसएमई-केन्द्रित दुनिया की पहली ऐसी रेटिंग एजेंसी है, जो भारतीय सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को क्रेडिट रेटिंग देती है। स्मेरा की सेवाओं का उद्देश्य पारदर्शिता को बढ़ावा देते हुए, विश्वास पैदा करते हुए और ऋण-प्रदायगी के निर्णय को सुविधाजनक बनाते हुए एसएमई पारितंत्र को सशक्त बनाना है। स्मेरा की स्थापना वित्त मंत्रालय और भारतीय रिज़र्व बैंक की संयुक्त पहल पर 2005 में हुई। इसने आज तक 50,000 से अधिक रेटिंग करने का उल्लेखनीय रिकॉर्ड बनाया है।

इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (आईएफसी) ने एमएसएमई क्षेत्र को ऋण-प्रवाह में सुधार लाने के मामले में स्मेरा को भारत सरकार की नयी, व्यवहार्य पहल बताया है। स्मेरा की स्थापना के लिए एसोसिएशन ऑफ डेवलपमेंट फाइनेंसिंग इंस्टीट्यूशन्स इन एशिया एंड द पैसिफिक (एडीएफआईएपी) ने वर्ष 2007 में सिडबी को एसएमई डेवलपमेंट वर्ग में “आउटस्टैंडिंग डेवलपमेंट प्रोजेक्ट अवार्ड” प्रदान किया। इस पुरस्कार के ज़रिए, एसएमई क्षेत्र के विकास के लिए ऋण की कमी वाले एसएमई क्षेत्र को ऋण-प्रवाह बढ़ाने की दिशा में भारतीय पहल को पहचान मिली। विश्व बैंक की ‘एसएमई वित्तीयन और विकास संबंधी परियोजना’ के अंतर्गत स्मेरा को डीएफआईडी, यूके द्वारा प्रदत्त तकनीकी सहायता अनुदान भी प्राप्त हुआ।

एक्यूइट रेटिंग्स एंड रिसर्च लि. के पूर्ण स्वामित्व वाली एक और सहायक संस्था ईएसजी रिस्क असेसमेंट्स एंड इनसाइट्स लि. (ईएसजी रिस्क. एआई) भारत की पहली ईएसजी रेटिंग कंपनी है। यह निवेशकों और कॉर्पोरेट्स को ईएसजी मूल्यांकन प्रदान करने की दिशा में अग्रणी है। वर्तमान में 600 से अधिक सूचीबद्ध भारतीय कम्पनियों की ईएसजी मूल्यांकन रिपोर्टें तथा रेटिंग को ईएसजी रिस्क. एआई के सब्स्क्रिप्शन प्लैटफॉर्म ‘ईएसजी 360 डिग्री’ पर देखा जा सकता है। ईएसजी रिस्क. एआई की रेटिंग पर्यावरण, सामाजिक तथा अभिशासन संबंधी ऐसे मुद्दों से जुड़े उभरते हुए जोखिमों के शमन के बारे में कंपनी की क्षमता के विषय में वस्तुनिष्ठ, स्वतंत्र और पूर्वग्रह-रहित राय देती हैं, जिनका कोई तथ्यात्मक वित्तीय प्रभाव पड़ता है। ईएसजी रेटिंग से ईएसजी निवेश चुनने, किसी कंपनी अथवा उद्योग विशेष के मूल्यांकन, ईएसजी व्यवसाय रणनीति की समीक्षा और नीतिगत पहलकदमियों की आवश्यकताओं की पहचान करने को बढ़ावा मिलता है।

सूचीबद्ध कंपनियों की ईएसजी रेटिंग के अलावा ईएसजी रिस्क.एआई गैर सूचीबद्ध कंपनियों का ईएसजी मूल्यांकन तथा ईएसजी अंतराल विश्लेषण भी उपलब्ध कराता है। इसका लक्ष्य ईएसजी सूचकांकन के लिए अपनी स्वयं की औचित्यपूर्ण पद्धति आरम्भ करना है। ईएसजीरिस्क.एआई ने भारत का सर्वप्रथम ईएसजी नेतृत्व पुरस्कार भी आरम्भ किया है जो बहुत विस्तृत क्रियापद्धति पर आधारित है।

आइसार्क

इण्डिया एसएमई ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड

इण्डिया एसएमई ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (आइसार्क) की स्थापना 11 अप्रैल 2008 को की गई तथा इसने 15 अप्रैल, 2009 को व्यावसायिक परिचालन आरम्भ किया। इसका मुख्य उद्देश्य अन्य के साथ साथ एमएसएमई क्षेत्र में स्थित अनर्जक आस्तियों (एनपीए) का अधिग्रहण करना है। आइसार्क की स्थापना का उद्देश्य यह है कि संभावित व्यवहार्य इकाइयों का तीव्र गति से पुनर्गठन हो सके तथा अव्यवहार्य इकाइयों का तत्परतापूर्वक परिसमापन हो, ताकि परिसंपत्तियों का अधिकतम उत्पादक उपयोग हो सके। आइसार्क के शेयरधारकों में प्रायोजकों के रूप में सिडबी, सिडबी वेंचर कैपिटल लिमिटेड, पंजाब नेशनल बैंक तथा बैंक ऑफ़ बडौदा प्रमुख हैं। अन्य शेयरधारकों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक तथा वित्तीय संस्थान शामिल हैं।

अभिग्रहण:

वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान, अधिकांश शेयरधारकों ने आइसार्क में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया था और विनिवेश प्रक्रिया को चलाने के लिए एक मर्चेंट बैंकर नियुक्त किया था। चूंकि विनिवेश की प्रक्रिया चल रही थी, मर्चेंट बैंकर ने नए खाते के अधिग्रहण पर यथास्थिति बनाए रखने का परामर्श दिया था, ताकि समुचि‍त सावधानी प्रक्रिया में कोई व्यवधान न हो। चूंकि विनिवेश फलीभूत नहीं हो सका/ विलम्ब हुआ, कंपनी के निदेशक मंडल ने नवंबर 2020 में कंपनी के पास उपलब्ध निधियों में से एनपीए के नए अधिग्रहणों के साथ परिचालन जारी रखने का निर्णय लिया। तथापि, वर्ष के दौरान अभिग्रहण हेतु कोई भी बोली प्रस्तुत नहीं की गई क्योंकि अधिकांश ऋणदाता जो अनर्जक आस्तियों का विक्रय करने के लिये सामने आये, वे नकद भुगतान की मांग कर रहे थे। वित्त वर्ष 2022 के दौरान, सिडबी ने फिर से, अपनी और अन्य शेयरधारकों की ओर से, विनिवेश की प्रक्रिया को शुरू किया और कंपनी में अपनी पूरी हिस्सेदारी मेसर्स धनसमृद्धि फाइनेंस प्राइवेट को बेचने का फैसला किया जिसके लिए अन्य शेयरधारक (एसवीसीएल सहित) भी विनिवेश (कुल बिक्री शेयर की 86.70 प्रतिशत) के लिए सहमत हुए हैं। तदनुसार, बिक्रीकर्ता शेयरधारकों (इक्विटी शेयर पूंजी का 86.70%) और बोली लगाने वाले एनबीएफसी के बीच 06 अप्रैल, 2022 को शेयर खरीद समझौते का निष्पादन किया गया है। कंपनी जल्द ही आरबीआई से संपर्क करेगी और विनिवेश तथा प्रायोजकों/ निदेशक में परिवर्तन के लिए अनुमोदन मांगेगी।

कार्यनिष्पादन:

आइसार्क ने वित्त वर्ष 2021-22 में (अनंतिम अलेखापरीक्षित वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार) 56.40 करोड़ रुपये की वसूली हासिल की, जबकि विगत वर्ष यह 8.28 करोड़ रुपये थी।वर्ष के दौरान 22.71 करोड़ रुपये मूल्य की प्रतिभूति वसूली (सिक्योरिटी रिसीट्स) की गई जबकि विगत वर्ष यह 1.46 करोड़ रुपये थी। यथा 31 मार्च, 2022 को आइसार्क के प्रबंधनाधीन 376.05 करोड़ की निवल आस्तियां थीं।

कृपया अधिक जानकारी के लिए, http://www.isarc.in पर जाएं.

आई एस टी एस एल

एमएसएमई क्षेत्र में तकनीकी आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने और इसमें तेजी लाने के  प्राथमिक उद्देश्य से इंण्डियन बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, इंडियन ओवरसीज बैंक और भारतीय स्टेट बैंक के साथ मिलकर नवंबर 2005 में सिडबी ने इंडिया एसएमई टेक्नोलॉजी सर्विसेज लिमिटेड (आईएसटीएसएल) की स्थापना की। 

समान गतिविधियों में संलग्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ प्रमुख साझेदारी के माध्यम से, आईएसटीएसएल एमएसएमईयों को विशेषज्ञ प्रौद्योगिकी सलाह और परामर्श सेवाएं प्रदान करता है ताकि वे उपलब्ध नवीनतम तकनीकी विकास का सर्वोत्कृष्ठ प्रयोग कर तेजी से बदलते बाजार में सक्षमता से प्रासंगिक बने रहें। एमएसएमई इकाइयों को घरेलू और वैश्विक स्तर पर आधुनिक प्रौद्योगिकियों के अधिग्रहण के लिए सुलभ अवसरों का उपयोग करने के लिए यह एक मंच प्रदान करने की एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आईएसटीएसएल द्वारा प्रदान की जाने वाली प्रमुख तकनीकी विकास सेवाओं में- प्रौद्योगिकी विकल्पों की जानकारी साझा करना, मिलान करना , वित्तीय समूहन और व्यावसायिक सहयोगों, सेमिनार / बैठकें आयोजित करना और बाजार समर्थन प्रदान करने की सेवाएँ शामिल हैं। आईएसटीएसएल का एक अन्य महत्वपूर्ण योगदान एमएसएमई क्षेत्र में ग्रीन हाउस गैसों में कमी की सुविधा के लिए किए जा रहे प्रयासों के साथ एमएसएमई क्षेत्र में ऊर्जा सक्षम, और पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए सुदृढ़ ध्यान केंद्रित करना है।

आईएसटीएसएल नवीकरणीय ऊर्जा (विशेष रूप से छत पर सौर पीवी प्रणाली परियोजनाएँ) के क्रियान्वयन के लिए परियोजना प्रबंधन परामर्श सेवाएं प्रदान कर रहा है।

आईएसटीएसएल उन गिनी चुनी एजेंसियों में से एक है जो एमएसएमई के लिए शून्य दोष - शून्य प्रभाव योजना से संबंधित जागरूकता कार्यशालाओं के संचालन के लिए चुनी गई है। आईएसटीएसएल को एकल बिंदु पंजीकरण योजना के तहत "द नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन लिमिटेड" के साथ एक तकनीकी निरीक्षण एजेंसी के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

अधिक जानकारी के लिए https://www.istsl.in देखें।